काशीवासियों को खुशखबरी, वाराणसी रोपवे परियोजना ने पकड़ी रफ़्तार

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यदि आप विश्व की प्राचीनतम जीवित नगर का अनुभव करने के लिए काशी आना चाहते हैं तो आपके लिए शुभ समाचार है। काशी के आकाशीय अवलोकन के लिए वाराणसी में भारत का पहला Commercial Varanasi Ropeway की सुविधा मिलने वाली है

भगवान भोलेनाथ की प्रीय नगरी काशी को देखने व यहाँ के अल्हड़पन जीवन का अनुभव करने के लिए लाखों लोग वाराणसी आते हैं तथा नगर के बढ़ती जनसंख्या के कारण वाराणसी के सड़कों पर भार भी बढ़ता ही जा रहा है। वाराणसी में मेट्रो व लाईट मेट्रो में विलंब को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में नगर के यातायात के लिए भारत में पहली बार रोपवे सेवा को क्रियाशील करने की तैयारी है।

वाराणसी शीघ्र ही सार्वजनिक परिवहन में रोपवे सेवाओं का उपयोग करने वाला पहला भारतीय शहर बनने वाला है। विश्व भर से बनारस आने वाले यात्रीयों को अब कैंट स्टेशन से गोदौलिया तक की यात्रा के लिए रोपवे की सुविधा मिलेगी।

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पिछली सभी जानकारियां जो भी आपके पास थीं वाराणसी रोपवे से जुड़ी हुई उसको अब आप भूल जाइए। क्यों कि इस परियोजना में बहुत परिवर्तित हो चुका है। बता दें कि वाराणसी विकास प्राधिकरण ने वाराणसी के सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री को प्रेजेटेंशन के माध्यम पूरी योजना दिखाई। उनकी सहमति मिलते ही वीडीए ने टेंडर जारी कर दिया। 29 जून टेंडर के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि है और 30 जून को निविदा खुलेगी।

इसपर अधिक जानकारी हेतु बता दें कि काशी में प्रस्तावित रोपवे का नवीन मार्ग तैयार किया गया है। जिसके अंतर्गत अब गिरिजाघर नहीं, कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया चौराहे तक रोपवे जाएगा।

नवीन रोपवे 3.75 किमी के रास्ते में पांच स्टेशन होंगे, जिसमें सिगरा साजन तिराहे की स्थान पर काशी विद्यापीठ अब नया स्टेशन होगा। श्री काशी विश्वनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखकर नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड ने परियोजना के एलाइनमेंट का विस्तृत अध्ययन कर पुन: फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की है। इसमें कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया चौराहे तक की यात्रा 17 मिनट में पूरी होगी। तथा अब यह वाराणसी रोपवे श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 16 घंटे की सेवा में उपलब्ध रहेगी।

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पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विकास का एक नया अध्याय जुडऩे वाला है। नेशनल हाईवे , रिंग रोड , फ्लाईओवर , आरओबी के पश्चात वाराणसी के भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए रोपवे चलेगा। नये प्रपोजल के अनुसार श्रद्धालु रोपवे से कैंट रेलवे स्टेशन से सीधे बाबा विश्वनाथ धाम और गंगा घाट पहुचेंगे।

सबसे बड़ी बात है कि योगी सरकार की ओर से कैंट स्टेशन से गोदौलिया के मध्य रोपवे परियोजना को हरी झंडी मिलने के पश्चात अब नए तरीके से धरातल पर उतारने की प्रक्रिया आरंभ हो गई है। अब इस वाराणसी रोपवे में 228 केबिन होंगे। हर तीन से चार मिनट के अंतराल पर यह सेवा उपलब्ध रहेगी। एक केबिन में 10 लोग सवार हो सकेंगे। तथा 6.5 मीटर प्रति सेकंड की गति से 17 मिनट में यह एक ओर की पूरी दूरी तय करेगी।

रोपवे से यात्रा करने वाले यात्री को वायु और ध्वनि प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी। रोपवे स्टेशन और ट्राली पर वाराणसी की कला, धर्म और संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। स्टेशन पर एस्केलेटर का भी प्रावधान है। कैंट रेलवे स्टेशन और गोदौलिया चौराहे पर टर्मिनल स्टेशन बनेगा। इस परियोजना की लागत लगभग 461.19 करोड़ रुपये है।

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वाराणसी रोपवे परियोजना की वर्तमान परिस्थिति की जानकारी देने हेतु बता दें कि वीडीए के अनुसार नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट कंपनी जो कि एनएचएआई के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है, उसको परियोजना को क्रियान्वयन करने हेतु नामित किया गया है। NHLML द्वारा परियोजना के एलाइनमेंट का विस्तृत अध्ययन कर पुन: फिजीबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर निविदा आमंत्रित कर दी गई है। तथा वाराणसी रोपवे परियोजना के टेंडर को एनएचएआई द्वारा हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) पर बनाया गया है। निविदा की अंतिम तिथि 30 जून 2022 निर्धारित की गई है।

आपको यदि इस वाराणसी रोपवे परियोजना में पड़ने वाले सभी स्टेशनों की जानकारी दें तो बता दें कि काशी में रोपवे संचालित करने के लिए नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड ने नगर का विस्तृत अध्ययन कर जो पुन: फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की है, उसके अनुसार इसमें अब पांच स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं। इसमें पहला स्टेशन कैंट रेलवे स्टेशन, उसके पश्चात दूसरा है काशी विद्यापीठ, तीसरा है रथयात्रा, तत्पश्चात गिरिजाघर क्रॉसिंग, जो की टर्निंग स्टेशन होगा, एवं अंतिम स्टेशन गोदौलिया चौराहा प्रस्तावित किया गया है।

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आपको यदि यह लग रहा होगा कि इतने समय से वाराणसी में रोपवे परियोजना की बात हो रही है परंतु धरातल पर उतरकर कुछ नहीं आया तो हम आपको बता दें कि वाराणसी विकास प्राधिकरण ने इसके पहले पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) माडल पर प्रस्तावित रोपवे की पायलट परियोजना की निविदा नवंबर में आमंत्रित की थी जिसमें कई बार निविदा के लिए समय भी बढ़ाई गई। जिसकी अंतिम तिथि 15 अप्रैल-2022 थी, परंतु उस निविदा पर कोई आवेदन नहीं आया। ऐसे में शासन ने पिछली कंपनी वैपकाॅस के फिसिबिलिटी रिपोर्ट निरस्त करके नेशनल हाईवे लाजिस्टिक मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड को शासन ने पुनः सर्वे करने का दायित्व सौंपा था।

जिसपर की नवीन कंपनी ने एलाइनमेंट का विस्तृत अध्ययन कर पुन: फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर वीडीए को सौंपा है। वर्तमान फीजिबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार परियोजना में पांच स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं जिसमें कैंट रेलवे स्टेशन, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजा घर क्रासिंग, तथा अंतिम स्टेशन गोदौलिया पर प्रस्तावित किया गया है। यहां पर यह बता दें कि पहले गिरजाघर चौराहे पर स्टेशन ही अंतिम था।

वाराणसी रोपवे के लिए बनने वाले सभी स्टेशन पर काशी की कला, धर्म और संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। रोपवे की ट्राली पर भी काशी की माडल दर्शाया जाएगा। कैंट रेलवे स्टेशन के पास ही रोडवेज है, इसलिए कैंट स्टेशन पर रोपवे स्टेशन बनने से ट्रेन और बस से यात्रा करने वाले दोनों यात्रियों को सुविधा होगी। कंपनी ने सर्वे पूरा करने के पश्चात फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की है।

कंपनी ने सर्वे करने के साथ रिपोर्ट सौंप दी है। मुख्यमंत्री ने प्रेजेटेंशन के माध्यम से रोपवे की पूरी योजना देखने के साथ सहमति जताई है। रोपवे की निविदा निकाली गई है।

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महत्वपूर्ण यह भी है कि जहां पिछली रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी रोपवे में चार स्टेशनों का निर्माण होना था तथा उसकी लागत लगभग 410 करोड़ रुपए थी। तो वहीं नवीन रिपोर्ट के अनुसार अब वाराणसी रोपवे परियोजना में पांच स्टेशनों के निर्माण के साथ अब इसकी लागत लगभग 461 करोड़ रुपए है। अर्थात पहले से एक स्टेशन अधिक व 51 करोड़ रुपए भी अधिक लागत अब आने वाली है।

मित्रों यदि आपको उपरोक्त दी हुई वाराणसी रोपवे की नवीन जानकारी पसंद आई हो तो कमेंट बाॅक्स में हर हर महादेव अवश्य लिखें।

अधिक जानकारी के लिए वीडियो देखें:

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