अब यूपी का विकास रोकने से भी नहीं रुकने वाला – Kanpur Lucknow Expressway
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UttarPradesh : तीव्र गति से विकास पथ पर अग्रसर भारत में एक नवीन कड़ी जुड़ने वाली है तथा गंगा से गोमती का अब होगा सीधा जुड़ाव अर्थात उत्तर प्रदेश की राजधानी को औद्योगिक राजधानी से जोड़ने वाली नवीन एक्सप्रेसवे (Kanpur Lucknow Expressway) की सौगात जनता को मिलने वाली है।
भारत को शीघ्र ही एक और एक्सप्रेसवे मिलेगा जो उत्तर प्रदेश के दो सबसे आवश्यक नगरों के मध्य की दूरी को कम करेगा।
बता दें की यह लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (Kanpur Lucknow Expressway) लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट से आरंभ होकर उन्नाव होते हुए कानपुर के प्रस्तावित रिंग रोड से जुड़ेगा।
सबसे महत्वपूर्ण है कि इस बहुप्रतीक्षित एक्सप्रेसवे का निर्माण आरंभ हो गया है। जी हां कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का निर्माण शनिवार 29 अक्टूबर से आरंभ हो गया है। वहीं दूसरी ओर भूमि अधिग्रहण का काम लगभग पूरा हो चुका है। तथा कार्यदायी संस्था पीएनसी का दावा है कि तय समय जून 2024 तक काम पूरा हो जाएगा।
इस परियोजना की अधिक जानकारी हेतु बता दें कि कानपुर से लखनऊ तक लगभग 63 किमी लंबे एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए कंपनी ने उन्नाव सदर तहसील क्षेत्र के तौरा गांव के पास अपना यार्ड बनाया है। यहां पर मौरंग, गिट्टी और मशीनें आदि का स्टाक लगाया है। अधिग्रहीत भूमि का समतलीकरण कार्य आरंभ कर दिया गया है। जनपद में सदर, पुरवा और हसनगंज तहसील क्षेत्र के 32 गांव कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की सीमा में आ रहे है। पीएनसी के प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार कार्य आरंभ हो गया है।
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विशेषताओं की जानकारी देने के लिए बता दें कि कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे छह लेन का बनेगा, परंतु इसकी डिजाइन आठ लेन की बनाई गई है ताकि भविष्य में उसे बढ़ाया जा सके। इसपर अधिकतम 120 की स्पीड मान्य होगी पर 120 किलोमीटर की स्पीड के ऊपर ब्रेक रहेगा। अर्थात 120 तक की गति से इस मार्ग पर वाहनों का होगा यातायात।
यह भी बता दें की एक्सप्रेसवे पर दोनों ओर जर्मनी तकनीक से एमिनिटी सेंटर बनाए जाएंगे, जहां पर यात्रियों को खाने से लेकर पेट्रोल-सीएनजी पंप, क्लीनिक, मेडिकल स्टोर, मिनी हाईवे हॉस्पिटल, रेस्टोरेंट, वर्कशॉप आदि की सुविधा मिलेगी।
इसके अतिरिक्त आपको बता दें की भारतीय राष्ट्रीय राज्य मार्ग प्राधिकरण अर्थात NHAI पहली बार 3D ऑटोमेटड मशीन गाइडेंस (AMG) मॉड्यूल को हाईवे निर्माण के लिए प्रयोग इसपर ही करने जा रही है। इस तकनीक के प्रयोग से हाईवे को बनाने की गति दुगनी हो जाएगी साथ ही इस तकनीक के माध्यम से NHAI के अधिकारी और कांट्रैक्टर्स, अपने फोन और कंप्यूटर पर काम की गति का सीधा अपडेट भी पा सकेंगे।
बता दें कि आगामी सौ वर्षों में बढ़ने वाले ट्रैफिक के दबाव को ध्यान में रखकर एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है। इसके बनने के पश्चात लखनऊ से कानपुर की यात्रा मात्र 45 से 50 मिनट में पूरा होगा। जो की अभी यह दूरी तय करने में दो से तीन घंटे का समय लगता है।
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बता दें कि इस एक्सप्रेसवे पर निर्माण कार्य आरंभ हो गया है। वहीं, लखनऊ की ओर से बिजली के खंभों को शिफ्ट करने के साथ ही रूट डायवर्जन को लेकर भी पत्राचार करने का कार्य आरंभ कर दिया गया है। इसके अनुसार कुछ समय के लिए भारी वाहनों को डायवर्ट किया जाएगा। उद्देश्य होगा कि वाहनाें का संचालन सामान्य रह सके। यह डायवर्जन वर्तमान में लखनऊ की ओर आने व जाने वाले वाहनों के लिए किया जाएगा। क्योंकि सैनिक स्कूल के पहले से रैंप बनाकार एलीवेटेड रोड पर लाया जाएगा। और यह सिंगल पिलर पर एलीवेटेड रूट होगा। तथा इस एक्सप्रेस-वे को कानपुर-अलीगढ़ जीटी रोड के अतिरिक्त कानपुर-इटावा हाईवे और कानपुर-झांसी हाईवे से भी जोड़ेगी।
यह एलीवेटेड रोड करीब 18 किमी. का होगा, जो बनी के आगे उतरेगा। इस 18 किलोमीटर के एलीवेटेड मार्ग से नीचे जनसंख्या बहुल क्षेत्र में यातायात पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके पश्चात 45 किलोमीटर का ग्रीन फील्ड मार्ग पुरवा, अचलगंज और लालगंज मार्ग को भी जोड़ेगा।
लक्ष्य है कि 2024 में लगभग 63 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे का ज्यादातर कार्य पूरा हो जाएगा। इससे कानपुर, उन्नाव और आसपास के जिलों को जाम के जंजाल से मुक्ति मिलेगी। साथ ही कारें और बड़े वाहन फर्राटा भरते नजर आएंगे।
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लगभग 2800 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण दो फेज में किया जा रहा है। जिसमें फेज एक में उन्नाव से बनी लगभग 45 किमी और फेज दो में बनी से लखनऊ तक लगभग 18 किमी का भाग है। फेज दो में एक्सप्रेसवे एलीवेटेड बनना है। जिसमें फेज एक पर 15 सौ करोड़ रुपये और फेज दो में 1288 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इस एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे परियोजना का कार्य 2 माह में दोनों छोर से तेज हो जाएगा। एक वर्ष में 40 प्रतिशत काम निपटा लेने का लक्ष्य है। एवं वर्ष 2024 में ही इस पर वाहन सरपट दौड़ने लगेंगे।
NE-6 को कई स्थानों पर रैंप, अंडरपास के माध्यम से स्थानीय मार्गों से जोड़ा जाएगा। ताकि अधिक से अधिक लोग एक्सप्रेसवे का लाभ उठा सके।
इस एक्सप्रेसवे में जिन संरचनाओं का निर्माण होना है वो कुछ इस प्रकार से हैं
02 बड़े पुल और 26 छोटे पुल22 पैदल अंडरपास और 16 वाहन अंडरपास01 रेलवे ओवरब्रिज, 06 स्थानों पर सर्विस रोड बनेगी। तथा उन्नाव में टोल प्लाजा भी बनाया जाएगा। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे छह लेन की होगी। परंतु पुल और फ्लाईओवर के स्ट्रक्चर आठ लेन के बनेंगे, ताकि भविष्य में जब भी आवश्यकता पड़े चौड़ाई बढ़ाई जा सके।
पीएनसी इंफ्राटेक को इसके निर्माण का उत्तर दायित्व दिया गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) लखनऊ की ओर से मांगी गई निविदा के फाइनेंशियल और टेक्निकल बिड के सभी मानकों पर यह कंपनी खरी उतरी थी। कंपनी को एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए प्लांट तैयार करने में लगभग पांच माह का समय लगना था। इसके पश्चात ही अब निर्माण कार्य आरंभ हो रहा है।
इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के पश्चात लखनऊ व कानपुर आने जाने वाले लोगों को सुविधा तो मिलेगी ही साथ ही यह मार्ग डिफेंस काॅरिडोर के लिए रीढ़ की हड्डी का कार्य करेगा। तथा उत्तर प्रदेश व भारत के विकास को रोक पाना असंभव होगा।
मित्रों हम आशा करते हैं कि आपको कानपुर लखनऊ एक्सप्रेसवे की जानकारी पसंद आई होगी, तो कमेंट बाॅक्स में हर हर महादेव अवश्य लिखें।
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