MLC Election Results 2026: चार राज्यों की 28 सीटों पर NDA का दबदबा, यूपी में अखिलेश यादव की सपा ने बढ़ाई ताकत; 2027 से पहले सियासी मुकाबला दिलचस्प
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नई दिल्ली। देश के चार राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र में विधान परिषद (MLC) की 28 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगियों ने कई राज्यों में अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (SP) ने अपनी स्थिति मजबूत करते हुए सत्तारूढ़ भाजपा को कड़ी चुनौती दी। महाराष्ट्र के नागपुर में कांग्रेस की जीत और बिहार में जन सुराज पार्टी का विधान परिषद में खाता खुलना भी इन चुनावों के प्रमुख नतीजों में शामिल रहा।
इन चुनावों को खास तौर पर उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से देखा जा रहा है, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। हालांकि, विधान परिषद चुनावों के नतीजे सीधे तौर पर विधानसभा चुनावों के परिणाम का अनुमान नहीं देते, लेकिन राजनीतिक दलों के लिए ये अपने संगठन और स्थानीय समर्थन का आकलन करने का अवसर जरूर हैं।

उत्तर प्रदेश में BJP और SP के बीच मुकाबला
उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा ने छह सीटें जीतीं, जबकि समाजवादी पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की। वर्ष 2020 के पिछले चुनाव की तुलना में सपा ने अपनी सीटों की संख्या में बढ़ोतरी की है।
समाजवादी पार्टी के लिए वाराणसी की दोनों सीटों पर जीत विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। इसके अलावा पार्टी ने लखनऊ स्नातक और आगरा-अलीगढ़ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र सहित अन्य सीटों पर भी सफलता हासिल की। भाजपा ने मेरठ की दोनों सीटों समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई निर्वाचन क्षेत्रों में अपना प्रदर्शन बरकरार रखा।
वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। ऐसे में यहां सपा की सफलता को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने नतीजों के बाद भाजपा पर निशाना साधा और पार्टी के प्रदर्शन को अपनी राजनीतिक ताकत के रूप में पेश किया।
बिहार में BJP की बढ़त, जन सुराज ने खोला खाता
बिहार की आठ विधान परिषद सीटों के चुनाव में भाजपा ने तीन सीटें जीतीं। जनता दल यूनाइटेड (JD-U) को एक सीट मिली, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भी एक सीट पर जीत हासिल की। जन सुराज पार्टी ने एक सीट जीतकर विधान परिषद में अपना खाता खोला। दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।
जन सुराज के लिए यह परिणाम महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी बिहार की राजनीति में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रही है। वहीं, पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राजद की जीत ने मुकाबले को दिलचस्प बनाया।
कर्नाटक में BJP-JD(S) गठबंधन का क्लीन स्वीप
कर्नाटक की चार विधान परिषद सीटों पर भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) के गठबंधन ने सभी सीटें जीत लीं। भाजपा ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि उसकी सहयोगी जेडीएस को एक सीट मिली।
इन नतीजों को राज्य की कांग्रेस सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, विधान परिषद के सीमित मतदाता समूह और निर्वाचन क्षेत्रों की प्रकृति को देखते हुए इन्हें पूरे राज्य के जनमत का सीधा प्रतिबिंब नहीं माना जा सकता।
महाराष्ट्र में नागपुर से कांग्रेस की बड़ी खबर
महाराष्ट्र की पांच विधान परिषद सीटों के चुनाव में मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3,271 मतों से हराया।
नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह क्षेत्र होने के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय भी है। ऐसे में कांग्रेस की यह जीत भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से उल्लेखनीय रही।
महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी (MVA) ने तीन सीटें जीतीं, जबकि सत्तारूढ़ महायुति के भाजपा और शिवसेना को एक-एक सीट मिली।
चार राज्यों में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
इन चुनावों में कुल 28 सीटों पर मतदान हुआ। उपलब्ध परिणामों के अनुसार, भाजपा ने 13 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा के सहयोगियों ने भी कई सीटों पर सफलता हासिल की। उत्तर प्रदेश में सपा की पांच सीटों की जीत और महाराष्ट्र में कांग्रेस की सफलता ने विपक्ष को भी राहत दी।
कर्नाटक में भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने चारों सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई। बिहार में भाजपा, जेडीयू, राजद, जन सुराज और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच सीटें बंटी रहीं।
क्या MLC चुनाव 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव का संकेत हैं?
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज होने की संभावना है। भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, जबकि अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की रणनीति पर काम करेगी।
MLC चुनावों में भाजपा की छह और सपा की पांच सीटें यह दिखाती हैं कि विधान परिषद के इन निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबला कड़ा रहा। वाराणसी में सपा की सफलता और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा का प्रदर्शन दोनों दलों के लिए अलग-अलग राजनीतिक संदेश लेकर आए हैं।
हालांकि, विधान परिषद चुनावों में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता विधानसभा चुनावों के मतदाताओं से अलग होते हैं। इसलिए इन नतीजों को 2027 के विधानसभा चुनाव का निश्चित संकेत मानना सही नहीं होगा।
निष्कर्ष: चार राज्यों के MLC चुनावों में भाजपा और उसके सहयोगियों ने कुल मिलाकर बढ़त हासिल की, लेकिन उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन और महाराष्ट्र में कांग्रेस की जीत ने विपक्ष को भी राजनीतिक चर्चा का अवसर दिया है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि ये नतीजे आने वाले महीनों में दलों की रणनीति और संगठनात्मक तैयारियों को किस तरह प्रभावित करते हैं।

