दिव्य-भव्य काशी विश्वनाथ धाम का भव्यतम होगा उद्घाटन

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच से उपजी काशी विश्वनाथ धाम की परिकल्पना दिव्य-भव्य स्वरूप लगभग साकार रूप ले चुकी है। और धर्मनगरी वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरीडोर ने अपनी छटा बिखेरनी आरंभ कर दी है।

काशी विश्वनाथ धाम हिंदूओं की आस्था का बहुत बड़ा केंद्र है। तथा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर वाराणसी के सांसद व भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्टस में से एक है। वर्तमान समय में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण-सुंदरीकरण परियोजना के अंतर्गत बाबा धाम से गंगधार तक कारिडोर निर्माण 90 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष 10 प्रतिशत में पानी- सीवर की पाइप, खिड़की-दरवाजे, वायरिंग व इलेक्ट्रिक फिटिंग समेत फिनिशिंग कार्य शेष हैं। इसे भी पांच दिसंबर तक पूरा कर लेने का लक्ष्य है ताकि 13 दिसंबर को वाराणसी के अति महत्वाकांक्षी परियोजना का लोकार्पण किया जा सके।

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काशी विश्वनाथ काॅरिडोर के उद्घाटन की अधिक जानकारी के लिए बता दें की काशी विश्वनाथ धाम के एक माह तक चलने वाले लोकार्पण समारोह के समयावधि में देशभर के लगभग दो हजार धर्माचार्य काशी में डेरा जमाएंगे। विश्वनाथ धाम सहित काशी के विभिन्न मठों, मंदिरों और गंगा तट पर गोष्ठी और संवाद के आयोजनों में सम्मिलित होकर ये संत समाज में राष्ट्रीय दायित्वबोध जागृत करेंगे।

इस समागम के लिए सभी अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, श्रीमहंत एवं महंतों के साथ सनातन संस्कृति के अनुयायी धर्मगुरुओं को आमंत्रण भेजा जा रहा है। इन अयोजनों के संयोजन का दायित्व काशी विद्वत परिषद को सौंपा गया है।

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नि‍त्‍य महोत्‍सव, नि‍त्‍य सुमंगल वाली काशी में एक और बड़े आयोजन की तैयारि‍यां आरंभ हो गयी हैं। आखि‍रकार वो शुभ घड़ी सामने आ ही गयी, जि‍सका लंबे समय से काशी सहि‍त देशभर के शि‍वभक्‍तों को प्रतिक्षा था। वि‍श्‍वनाथ धाम का भव्‍य उद्घाटन होने जा रहा है। इस समयावधि में दो दि‍वसीय दौरे पर प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी काशी पधारेंगे। यही नहीं काशी वि‍श्‍वनाथ धाम की तरह ही इसका उद्घाटन समारोह भी भव्‍य और दि‍व्‍य होगा। भारत की सभी प्रमुख नदि‍यों के जल से बाबा का अभि‍षेक होगा। केवल इतना ही नहीं भगवान शि‍व के सभी 12 ज्‍योति‍र्लिंगों के प्रमुख पुजारि‍यों को भी इस महाआयोजन के लि‍ये नि‍मंत्रण भेजा जा रहा है।

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काशी वि‍श्‍वनाथ धाम के भव्‍य उद्घाटन समारोह में वाराणसी के सभी प्रमुख घाटों को दीपों से सजाया जाएगा, साथ ही आति‍शबाजि‍यां भी होंगी, जि‍ससे दि‍व्‍य अनुभूति‍ मि‍लेगी। लेजर शो के माध्यम से श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर निर्माण का इतिहास व कारिडोर निर्माण का विकास दिखाया जाएगा। गंगा तट पर दीपावली जैसा प्रकाश और आतिशबाजी होगी। इसे देशभर में और अधिक भव्य बनाने के लिए समस्त कार्यक्रम का पूरे देश में सीधा प्रसारण किया जाएगा। समस्त ज्योतिर्लिंगों, बड़े शिवालयों व देवालयों में भी बड़ी एलइडी स्क्रीन लगाई जाएगी। जिससे वहां उपस्थित लोग काशी विश्वनाथ धाम की सुंदरता और भव्यता को देख सकें।

विश्वनाथ धाम के भव्य लोकार्पण आयोजन व अनुष्ठान का प्रसाद पूरी काशी ग्रहण करेगी। साथ ही श्रीकाशी विश्वनाथ धाम निर्माण से संबंधित पूरी जानकारी देने वाले पंफलेट का भी वितरण किया जाएगा। यह कार्य सूचना विभाग के सहयोग से किया जाएगा जबकि प्रसाद वितरण कार्य की व्यवस्था श्रीकाशी विश्वनाथ ट्रस्ट की ओर से होगी। भव्य आयोजन का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि गंगा के घाट शंख ध्वनि से गूंज जाएंगे।

तिथि विशेष से पूरे एक माह तक काशी नगरी पूरी तरह आध्यात्मिकता के रंगों में सराबोर नजर आएगी। वास्तव में भव्य काशी, दिव्य काशी, चलो काशी अभियान के अंतर्गत गांव-गलियों से नित्य श्रीकाशी विश्वनाथ धाम यात्रा निकाली जाएगी। इसका समापन मकर संक्रांति पर 14 जनवरी को किया जाएगा, इसमें समूची काशी में वाद्य यंत्रों की धुन पर सुरमयी भक्ति गंगा प्रवाहमान होगी।

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और हो भी क्यों ना बता दें कि‍ लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे श्री काशी वि‍श्‍वनाथ धाम प्रोजेक्‍ट का शि‍लान्‍यास 8 मार्च 2019 को देश के प्रधानमंत्री और वाराणसी के सांसद नरेन्‍द्र मोदी ने कि‍या था। ऐतिहासिक रूप से इस मंदिर का जीर्णोद्धार इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर द्वारा वर्ष 1780 में कराए जाने के लगभग 241 वर्षों के पश्चात श्री काशी वि‍श्‍वनाथ धाम मूर्त रूप लेने जा रहा है।

तथा सबसे महत्वपूर्ण की पीएम मोदी के प्रयास से माँ गंगा और बाबा विश्वनाथ के बीच अब कोई नहीं है। दोनों एक दूसरे को निहार सकते हैं। यही नहीं इसके साथ ही गंगा को गर्भ गृह तक भी लाने की तैयारी हो रही है।

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बाबा विश्वनाथ के गर्भ गृह से गंगा के सीधे जुड़ाव के लिए एक पाइप लाइन बिछाई जा रही है। महाश्मशान मणिकर्णिका से सटे ललिता घाट से मंदिर के गर्भगृह तक शीघ्र ही इस पाइप लाइन से गंगा जल सीधे बाबा तक पहुंचेगी। इसमें दो पाइप होंगी जिनमें से एक पाइप लाइन से गंगा का जल बाबा के गर्भगृह तक आएगा जबकि दूसरी पाइप लाइन से गर्भगृह में चढ़ने वाला दूध और गंगाजल वापस गंगा में समाहित हो जाएगा। जल और दूध को गंगा तक पहुंचाने के लिए बिछाई गई पाइप लाइन का ट्रायल बीते बुधवार को हुआ है।

बता दें की 55 करोड़ की लागत से कारिडोर के विस्तारित नौ छोटे कार्य आगे भी किए जाते रहेंगे। इनमें ललिता घाट का पुनर्विकास, कैफे भवन, रैंप भवन आदि सम्मिलित हैं। इन कार्यों को बाद में कॉरिडोर से जोड़ा गया था, बाढ़ के कारण इन्हें हाल ही में स्वीकृति व बजट मिला है। वैसे अभी गंगा का जल स्तर सामान्य न होने से सीढिय़ों का कार्य आरंभ नहीं हो सका है।

जानकारी के लिए बता दें की पूरब में गंगा द्वार से मंदिर चौक, मंदिर परिसर होते हुए धाम के पश्चिमी छोर तक कुल 108 पेड़ व वनस्पतियां लगाई जाएंगी। पेड़ों में बेल, अशोक और शमी को प्रमुखता दी जाएगी। पहले फलदार वृक्ष भी लगाने की योजना थी परंतु बाबा के भक्तों को बंदरों से बचाने के लिए यह योजना परिवर्तित हुई है। निर्धारित दूरी पर पेड़ लगाने के लिए लगभग दो फुट व्यास के गड्ढे बनाए गए हैं। इनमें मिट्टी भी भरी जा चुकी है।

इसके अतिरिक्त विश्वनाथ मंदिर के मुख्य गर्भगृह में नक्काशीदार खंभों के पीछे की दीवार पर साहित्य और पाषाण शिल्प का अनूठा संगम दिखेगा। सूर्यास्त के पश्चात यह गैलरी बहुरंगी प्रकाश में अनूठी आभा बिखेरेगा। गैलरी के पूर्वी भाग में शिव महिम्न स्तोत्र और संध्या वंदन का विधान संगमरमर के पत्थर पर उकेरा गया है। व गैलरी के दक्षिणी भाग में संगमरमर से उकेरी गई थ्रीडी आकृतियों में बाबा विश्वनाथ और माता गंगा से जुड़े प्रसंगों को दर्शाया गया है।

विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह के बाहर से ताड़केश्वर और रानीभवानी के शिवालयों तक फासाड लाइटिंग पूरी की जा चुकी है।

यही नहीं विश्वनाथ धाम के दोनों ओर बसे मोहल्लों में लोगों को सरस्वती फाटक और पांचों पंडवा की ओर जाने के लिए लंबा चक्कर नहीं लगाना होगा। विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के साथ ही सरस्वती फाटक और नीलकंठ द्वार जनता के लिए खोल दिए जाएंगे।

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अब यदि हम कॉरिडोर निर्माण में तथाकथित तोड़े गए मंदिरों की जानकारी दें तो आपको बता दें की इस ऐतिहासिक कार्य में भी हतोत्साहित करने का कुछ तत्वों ने प्रयास किया। मंदिरों को तोडऩे, स्वरूप बिगाडऩे समेत अन्य अफवाह उड़ाई गई। वास्तव में जैसे-जैसे भवन ध्वस्त किए जाते रहे। कई मंदिर सामने आते रहे। इन मंदिरों की परिस्थिति भी बहुत खराब थी। ऐसे भी मंदिर मिले जिससे सटे शौचालय बना लिए गए थे। घरों से छोटे मंदिर और शिखर वाले बड़े मंदिर भी सामने आए। इन प्राप्त विग्रहों का विधि विधान से स्थान परिवर्तन किया गया है। बड़े मंदिरों के साथ ही छोटे मंदिरों को भी सम्मान दिया गया। अभी शिखर वाले 25 बड़े मंदिरों में से 17 का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। हालांकि इनसे वैदिक केंद्र का स्थान बदलना पड़ा। तथा कॉरिडोर के योजनागत अतिथि गृह व मुमुक्षु भवन को छोटा भी करना पड़ा। बता दें की विग्रहों को स्थापित करने के लिए परिसर में 27 छोटे-छोटे मंदिर बन रहे हैैं। पहले जो मंदिर जर्जर थे, उन्हें संवारा जा रहा है। यही नहीं मुख्य मंदिर परिसर में भी पंचायतन स्वरूप के निरंतरता को बनाए रखने के लिए सात मंदिर बन रहे हैं। सरल शब्दों में कहें तो प्राप्त व विग्रहों व मंदिरों के साथ जीर्णशीर हो चुके मंदिरों को संरक्षित किया जा रहा है तथा कई मंदिरों को सुनियोजित तरीके से अब पुनर्सथापित उचित स्थान पर किया जा रहा है। यही कारण है कि कुछ अराजक तत्वों को अफवाह फैलाने का अवहर मिल गया।

बता दें की वर्तमान समय में मंदिर के चारों ओर परिक्रमा पथ तैयार किया गया है। काशी विश्वनाथ धाम को सात प्रकार के पत्थरों से भव्य रूप दिया जा रहा है। कॉरिडोर में अब सुंदरीकरण का कार्य ही शेष है जिसके लिए 22 सौ श्रमिक कार्यारत हैं।

काशीपुराधिपति के भव्य धाम में चुनार के गुलाबी पत्थरों की सुरमयी आभा और मकराना के सफेद पत्थरों की चमक नजर आ रही है। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में मंदिर चौक बन गया है.

मंदिर चौक गंगा व्यू गैलरी में खड़े होकर बाबा विश्वनाथ के भक्त अपने आराध्य की अर्चना के समयावधि में गंगा को भी निहारेंगे। जलासेन और मणिकर्णिका के मध्य बनने वाले भव्य द्वार से गंगा स्नान कर श्रद्धालु मंदिर के लिए प्रवेश करेंगे। तथा काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का सड़क मार्ग से मुख्य प्रवेश द्वार गोदौलिया गेट बनकर तैयार हो चुका है।

बता दें कि परिसर का मंदिर चौक, कॉरिडोर में सबसे बड़ा क्षेत्र है। इसमें श्रद्धालु सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसमें ही बनारस गैलरी होगी जहां बनारस से संबंधित हस्तशिल्प और साहित्य उपलब्ध होंगे। इसके दोनों ओर विभिन्न भवन जैसे कि विश्रामालय, संग्रहालय, वैदिक केंद्र, वाचनालय, दर्शनार्थी सुविधा केंद्र, व्यावसायिक केंद्र, पुलिस एवं प्रशासनिक भवन, वृद्ध एवं दिव्यांग के लि‍ये एक्सीलेटर एवं मोक्ष भवन इत्यादि निर्मित किए गये हैं।

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गंगा छोर पर बनेगा मणिकर्णिका गेट और दिव्यांग व वृद्धजन के लिए रैंप। कॉरिडोर के म्यूजियम में बाबा धाम का इतिहास ही नहीं पौराणिक महत्व भी होगा संरक्षित।

कॉरिडोर निमार्ण के पश्चात श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रति वर्ष आने वाले करोड़ों देशी-विदेशी श्रद्धालुओं का आवागम एवं दर्शन-पूजन करना पहले की अपेक्षा लाख गुना सुगम हो जाएगा।

देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में सजा-संवरा और विस्तारित बाबा धाम का जब 13 दिसंबर को लोकार्पण किया जाएगा तो धर्म-अध्यात्म का रंग और चटख हो जाएगा।

मित्रों यदि आपको वीडियो में दी हुई काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण कार्य की विशेष जानकारी पसंद आई हो तो हर हर महादेव कमेंट बाॅक्स में अवश्य लिखें।

अधिक जानकारी के लिए विडियो देखें:

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