साइक्लोन अर्नब का कहर: आंध्र प्रदेश में 5 मौतें, ओडिशा में ऑरेंज अलर्ट; दिल्ली-NCR और पूर्वी यूपी में भी बारिश की चेतावनी

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नई दिल्ली/विशाखापत्तनम, 29 अक्टूबर 2026: बंगाल की खाड़ी से उठे अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ (Cyclone Arnab) ने भारत के पूर्वी तटीय इलाकों में भारी बारिश, तेज हवाओं और व्यापक नुकसान के बाद अब कमजोर होना शुरू कर दिया है। 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और यानम के तट को पार करने वाले इस तूफान के कारण बिजली व्यवस्था, सड़कें, मकान और कृषि क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। आंध्र प्रदेश सरकार के मुताबिक, चक्रवात से जुड़ी घटनाओं में पांच लोगों की मौत हुई है। वहीं, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों में भारी बारिश का खतरा बना हुआ है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 29 अक्टूबर की सुबह तक तूफान कमजोर होकर डिप्रेशन में बदल गया था। इसके बावजूद इससे जुड़ी नमी और बारिश का प्रभाव कई राज्यों में देखने को मिल सकता है। दिल्ली-NCR में गरज-चमक और ओलावृष्टि की आशंका है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

साइक्लोन अर्नब का कहर: आंध्र प्रदेश में 5 मौतें, ओडिशा में ऑरेंज अलर्ट; दिल्ली-NCR और पूर्वी यूपी में भी बारिश की चेतावनी
Cyclone Arnab 2026:

1. साइक्लोन अर्नब ने कहां और कब लैंडफॉल किया?

चक्रवात अर्नब ने 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश और यानम के तट को पार किया। IMD के अनुसार, लैंडफॉल के दौरान तूफान की अधिकतम निरंतर हवा की गति लगभग 125–135 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जबकि झोंकों की गति 150 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई थी।

तूफान का प्रभाव विशेष रूप से आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में देखा गया। तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के कारण पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए, निचले इलाकों में जलभराव हुआ और फसलों को नुकसान पहुंचा।

लैंडफॉल के बाद तूफान उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ते हुए अंदरूनी इलाकों में कमजोर हुआ। 29 अक्टूबर की सुबह इसका अवशेष दक्षिण छत्तीसगढ़ और दक्षिण ओडिशा के आसपास डिप्रेशन के रूप में दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने इसके आगे कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदलने का अनुमान जताया।

2. कितने लोगों की मौत हुई? क्या है ताजा आंकड़ा?

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 29 अक्टूबर को बताया कि चक्रवात से जुड़ी घटनाओं में पांच लोगों की मौत हुई है। मृतकों के परिवारों को राज्य सरकार की ओर से पांच-पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई है।

मौतों के कारणों में तेज हवाओं के दौरान बिजली के खंभे या पेड़ गिरने और बिजली से जुड़े हादसों जैसी घटनाएं शामिल हैं। हालांकि, अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में मृतकों की संख्या में अंतर देखने को मिला है। इसलिए अंतिम राष्ट्रीय आंकड़े के लिए संबंधित राज्य प्रशासन और आधिकारिक आपदा प्रबंधन बुलेटिन की पुष्टि जरूरी है।

तूफान से पहले आंध्र प्रदेश और ओडिशा में एक लाख 80 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया था। समय रहते लोगों को निकालने, राहत केंद्र तैयार करने और आपातकालीन टीमों को तैनात करने से संभावित नुकसान को कम करने में मदद मिली।

3. आंध्र प्रदेश में कितना नुकसान हुआ?

आंध्र प्रदेश चक्रवात से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में रहा। राज्य सरकार के शुरुआती आकलन के अनुसार:

  • लगभग 15,000 बिजली के खंभे उखड़ गए।
  • 14 जिलों में कृषि भूमि और खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा।
  • कई इलाकों में सड़कें, मकान, पेड़ और बिजली की लाइनें प्रभावित हुईं।
  • तटीय क्षेत्रों में भारी बारिश से निचले इलाकों में जलभराव हुआ।
  • कुछ जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई, हालांकि अधिकांश प्रभावित क्षेत्रों में बहाली का काम शुरू कर दिया गया।

सरकार ने प्रभावित किसानों की फसलों और बागवानी को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए अधिकारियों को फील्ड सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। प्रारंभिक नुकसान का आकलन केंद्र सरकार को भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

4. ओडिशा में ऑरेंज अलर्ट: किन जिलों पर नजर?

आंध्र प्रदेश में लैंडफॉल के बाद चक्रवात का असर दक्षिणी और पश्चिमी ओडिशा में भी देखा गया। भारी बारिश, तेज हवाओं और कुछ पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की आशंका के चलते प्रशासन ने राहत एवं बचाव व्यवस्था मजबूत की है।

29 अक्टूबर को जारी मौसम संबंधी रिपोर्टों में ओडिशा के नौ जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट बताया गया। इनमें शामिल हैं:

  • संबलपुर
  • झारसुगुड़ा
  • सुंदरगढ़
  • देवगढ़
  • सोनपुर
  • बौध
  • कंधमाल
  • गजपति
  • गंजाम

अलर्ट और उसकी अवधि में बदलाव हो सकता है, इसलिए जिलेवार नवीनतम IMD बुलेटिन देखना जरूरी है। दक्षिणी ओडिशा के मलकानगिरी, कोरापुट, नबरंगपुर और रायगढ़ा जैसे क्षेत्रों में भी भारी बारिश और संवेदनशील स्थानों पर भूस्खलन के जोखिम को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई।

राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत शिविरों में भोजन और पेयजल उपलब्ध कराने तथा बिजली और संचार सेवाओं को जल्द बहाल करने के निर्देश दिए हैं।

5. दिल्ली-NCR में बारिश और ओलावृष्टि की आशंका

साइक्लोन अर्नब के कमजोर होने के बावजूद देश के उत्तरी हिस्सों में मौसम अस्थिर रहने का अनुमान है। IMD के 29 अक्टूबर के पूर्वानुमान के अनुसार, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब के कुछ हिस्सों में गरज-चमक, तेज हवाओं और अलग-अलग स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना है।

दिल्ली-NCR में बारिश के कारण यातायात, दृश्यता और बाहरी गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, दिल्ली के लिए किसी विशेष रंग के अलर्ट की पुष्टि करने से पहले संबंधित समय का आधिकारिक स्थानीय बुलेटिन देखना चाहिए।

लोगों को सलाह दी जाती है कि वे खराब मौसम में पेड़ों, बिजली के खंभों, होर्डिंग और कमजोर संरचनाओं के नीचे खड़े न हों। वाहन चलाते समय भी सावधानी बरतें।

6. पूर्वी उत्तर प्रदेश और वाराणसी में क्या है अलर्ट?

उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में 29 और 30 अक्टूबर को बारिश की संभावना जताई गई है। पूर्वी यूपी में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति भी बन सकती है।

वाराणसी सहित पूर्वांचल के लोगों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखनी चाहिए। बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, सड़कों पर फिसलन और यातायात में परेशानी हो सकती है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक जैसा अलर्ट नहीं है। मौसम की चेतावनी जिले और समय के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर, आजमगढ़, बलिया और आसपास के जिलों के लिए अलग-अलग जारी होने वाले अपडेट देखना अधिक उपयोगी होगा।

7. बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का खतरा

चक्रवात के अवशेषों और उनसे जुड़ी नमी के कारण पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों में बारिश की संभावना बनी हुई है।

बिहार: 29 अक्टूबर को भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका है। अगले कुछ दिनों तक कई क्षेत्रों में बारिश और गरज-चमक जारी रह सकती है।

झारखंड: भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश का भी पूर्वानुमान है।

छत्तीसगढ़: चक्रवात का कमजोर हुआ सिस्टम दक्षिणी हिस्सों से आगे बढ़ा है। 29 और 30 अक्टूबर को कई क्षेत्रों में बारिश और कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

पूर्वी मध्य प्रदेश: कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

इन राज्यों में स्थानीय प्रशासन को जलभराव, नदियों और नालों के बढ़ते जलस्तर, कमजोर मकानों तथा फसलों को संभावित नुकसान पर नजर रखने की जरूरत है।

8. पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत का मौसम

पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ हिस्सों में भी बारिश की संभावना है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के क्षेत्रों में भारी बारिश से सड़क यातायात और पहाड़ी मार्ग प्रभावित हो सकते हैं।

पूर्वोत्तर भारत के लिए मौसम विभाग के पूर्वानुमान में अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बताई गई है। अरुणाचल प्रदेश में आने वाले दिनों में कुछ क्षेत्रों में बारिश बढ़ सकती है।

हालांकि, पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के लिए एक समान ऑरेंज या रेड अलर्ट घोषित होने की पुष्टि नहीं है। स्थानीय चेतावनियों के आधार पर ही जोखिम का आकलन किया जाना चाहिए।

9. दक्षिण अंडमान सागर में नया कम दबाव का क्षेत्र

इसी बीच, 29 अक्टूबर को दक्षिण अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की सूचना मिली है। IMD के अनुसार, यह सिस्टम अगले 24 घंटों में और स्पष्ट हो सकता है तथा उसके बाद के 24 घंटों में दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्र में डिप्रेशन में बदलने की संभावना है।

यह नया सिस्टम चक्रवात अर्नब के कमजोर हुए अवशेषों से अलग मौसम प्रणाली है। फिलहाल इसके भविष्य के मार्ग, तीव्रता और संभावित प्रभाव के बारे में नए मौसम बुलेटिन का इंतजार करना चाहिए। केवल कम दबाव का क्षेत्र बनने से यह तय नहीं होता कि नया चक्रवात अवश्य आएगा या किसी विशेष राज्य से टकराएगा।

10. सरकार ने क्या राहत और बचाव कदम उठाए?

केंद्र और राज्य सरकारों ने चक्रवात से पहले और उसके बाद कई स्तरों पर कदम उठाए हैं।

केंद्र सरकार: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पुडुचेरी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। NDRF और SDRF की टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में लगी हैं। केंद्र ने नुकसान का आकलन करने के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीमों (IMCTs) को भेजने की बात कही है।

आंध्र प्रदेश सरकार: मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने मृतकों के परिवारों के लिए पांच-पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि घोषित की। प्रभावित परिवारों, किसानों, मछुआरों और अन्य पात्र लोगों के लिए सहायता की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। राज्य सरकार ने बिजली, पेयजल और दूसरी जरूरी सेवाओं को बहाल करने पर जोर दिया है।

ओडिशा सरकार: मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने तथा बिजली, पेयजल और संचार सेवाओं की बहाली के निर्देश दिए। ODRAF, NDRF और अग्निशमन सेवाओं को सतर्क रखा गया है।

कृषि सहायता: प्रभावित खेतों और बागवानी का नुकसान दर्ज करने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। सहायता की पात्रता और राशि फसल, नुकसान तथा लागू सरकारी नियमों के अनुसार तय होगी।

अभी हर प्रभावित व्यक्ति के लिए एक समान राष्ट्रीय राहत पैकेज या केंद्र से जारी किसी निश्चित कुल राहत राशि की पुष्टि उपलब्ध नहीं है। राज्य की घोषित अनुग्रह राशि, प्रस्तावित सहायता और अंतिम स्वीकृत मुआवजे को अलग-अलग समझना जरूरी है।

11. क्या ट्रेन और हवाई सेवाएं प्रभावित हुईं?

चक्रवात के दौरान खराब मौसम और सुरक्षा संबंधी कारणों से कुछ रेल सेवाएं रद्द या पुनर्निर्धारित की गईं। उड़ानों और स्थानीय परिवहन पर भी मौसम का असर पड़ सकता है।

यात्रियों को रेलवे की आधिकारिक पूछताछ सेवा, संबंधित एयरलाइन और हवाई अड्डे के ताजा अपडेट देखकर ही यात्रा करनी चाहिए। हर ट्रेन या उड़ान रद्द होने की बात सही नहीं होगी; प्रभाव मार्ग, समय और स्थानीय मौसम पर निर्भर करता है।

12. आम लोगों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

  1. IMD और जिला प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें।
  2. बिजली गिरने के दौरान खुले मैदान, पानी और ऊंचे पेड़ों से दूर रहें।
  3. तेज हवाओं में कमजोर छतों, होर्डिंग और बिजली के खंभों से दूर रहें।
  4. जलभराव वाले रास्तों और तेज बहाव वाले नालों को पार न करें।
  5. तटीय इलाकों में मछुआरे समुद्र में जाने से पहले स्थानीय प्रतिबंध और मौसम संबंधी निर्देश जांचें।
  6. मोबाइल फोन चार्ज रखें और जरूरी दवाइयां, पीने का पानी तथा आपातकालीन संपर्क उपलब्ध रखें।
  7. अफवाहों के बजाय मौसम विभाग और जिला प्रशासन के सत्यापित अपडेट साझा करें।

निष्कर्ष

साइक्लोन अर्नब आंध्र प्रदेश के तट को पार करने के बाद कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन इसके प्रभाव से जुड़ी बारिश और तेज हवाओं का खतरा कई राज्यों में बना हुआ है। आंध्र प्रदेश में जान-माल और कृषि को नुकसान पहुंचा है, जबकि ओडिशा और मध्य-पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में बारिश को लेकर सतर्कता जारी है।

दिल्ली-NCR, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के लोगों को स्थानीय पूर्वानुमान पर नजर रखनी चाहिए। दक्षिण अंडमान सागर में बने नए कम दबाव के क्षेत्र की निगरानी भी जारी है। आने वाले घंटों में मौसम की स्थिति और राहत कार्यों की प्रगति को लेकर नए अपडेट महत्वपूर्ण होंगे।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट 29 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध मौसम बुलेटिन और प्रकाशित सरकारी बयानों पर आधारित है। मौतों, नुकसान, अलर्ट और राहत राशि के आंकड़े नए आधिकारिक अपडेट के साथ बदल सकते हैं।

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