गंगा एक्सप्रेसवे ने पकड़ी रफ्तार, हुआ निर्माण कंपनियों का चयन

मेरठ से प्रयागराज तक प्रस्तावित 594 किमी लंबे छह लेन गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण का जिम्मा अडानी समूह और आईआरबी को सौंपा गया है। यूपी सरकार का दावा है कि यह देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होगा। मेरठ से अमरोहा तक एक चरण का काम आईआरबी को मिला चुनाव से पहले पीएम मोदी और मुख्यमंत्री योगी इसका शिलान्यास कर सकते हैं।

मेरठ से प्रयागराज तक प्रस्तावित 594 किमी लंबे छह लेन गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण का जिम्मा अडानी समूह और आईआरबी को दिया गया है। बुधवार को करीब 36 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनियों का चयन हो गया। कुल तीन कंपनियों ने बोली लगाई थी। पहले चरण में मेरठ से अमरोहा तक का काम आईआरबी को मिला है। अमरोहा से प्रयागराज तक तीन चरणों का काम अडानी समूह करेगा।

मेरठ को प्रयागराज से जोड़ने वाले गंगा एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण का काम चल रहा है। इसके सहारे औद्योगिक कॉरिडोर भी बसाया जाएगा। मेरठ में 152 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना है। जमीन किसानों से सहमति के आधार पर ली जा रही है। मेरठ में सिर्फ 23 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण ही बाकी है। इसके लिए शासन की ओर से एक समिति का गठन किया गया है। ये समिति गांव में जाकर किसानों को गंगा एक्सप्रेसवे की खूबियों के बारे में बताएगी।

इस एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण का काम लगभग पूरा हो चुका है। इसके दोनों ओर औद्योगिक कॉरिडोर भी स्थापित किए जाएंगे। उप्र एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने पूरे प्रोजेक्ट को 12 पैकेज और चार ग्रुप में बांटा है।

चार चरणों में इनको काम

ग्रुप 1 – मेरठ से अमरोहा, 129 किमी (आईआरबी)
बोली – 1782 करोड़ रुपये

ग्रुप 2 – बदायूं से हरदोई, 151 किमी (अडानी इंटरप्राइजेज)
बोली – 1950 करोड़ रुपये

ग्रुप 3 – हरदोई से उन्नाव, 155 किमी (अडानी इंटरप्राइजेज)
बोली – 2197 करोड़ रुपये

ग्रुप 4 – उन्नाव से प्रयागराज, 156 किमी (अडानी इंटरप्राइजेज)
बोली – 2099 करोड़ रुपये

गंगा एक्प्रेसवे प्रोजेक्ट की जानकारी के लिए वीडियो देखें :

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