अयोध्या श्री राम मंदिर निर्माण पर निर्माण समिति का आया बड़ा निर्णय

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अयोध्या : रामनगरी में (Ayodhya Ram Mandir Nirman) भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य अत्यंत तीव्र गति से संचालित है। जो देख समस्त विश्व का सनातनी हृदय भाव विभोर हो रहा है। समय-समय पर मंदिर निर्माण से जुड़ी जानकारियां ट्रस्ट के पदाधिकारियों की ओर से राम भक्तों तक पहुंचाई भी जाती हैं। परंतु इस बार जो जानकारी सामने आई है वह अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Ayodhya : अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्य के मध्य ही बीते दिनों श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसके महासचिव चंपत राय ने बताया कि राम मंदिर का निर्माण पहले से चल रहे टाइमलाइन के अनुसार हो रहा है और इस वर्ष के अंत तक हम प्राण प्रतिष्ठा कर सकते हैं। रामलला की प्रतिमा आसमानी और ग्रे कलर के पत्थरों से तैयार होगी, जो देखने में अत्यंत सुंदर होगी।

Ayodhya Ram Mandir
Ayodhya Ram Mandir Nirman

यह प्रतिमा 5 वर्ष के बालक के स्वरूप पर बनाई जाएगी। जिसकी ऊंचाई साढ़े आठ फीट होगी। मूर्ति के प्रारूप के तौर पर 9 इंच से 12 इंच तक के मॉडल बनाए जाएंगे। राय ने बताया राम भक्तों को अपने आराध्य के दर्शन लगभग 30 से 35 फीट की दूरी से होंगे। प्रतिमा इतनी बड़ी होगी कि श्रद्धालु भगवान की आंख और भगवान के चरण अपनी आंखों से देख सकेंगें।
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अधिक जानकारी हेतु बता दें कि राम मंदिर में लगने वाली रामलला की मूर्ति का कई चित्रकार पहले चित्र बनाएंगे, फिर चित्र को देखा जाएगा कि कौन सा चित्र हृदय को छू रहा है। उससे मूर्तिकार 9 से 12 इंच की मूर्ति बनाएंगे, मूर्ति में रामलला की आंख, नाक, कान, पैर की उंगली देखी जाएगी। तब राम मंदिर में लगने भगवान राम के बालरूप की प्रतिमा के बारे में निर्णय किया जाएगा और तब विशेषज्ञों की टीम रामलला की प्रतिमा बनाएगी। तथा इस प्रकार से प्रतिमा निर्माण में 5 से 6 महीने लगेंगे।

Ram Mandir Ayodhya
Ram Mandir Ayodhya

बता दें कि श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार राम मन्दिर में आने वाले श्रद्धालु 30 से 35 फुट दूरी से ही दर्शन कर पाएंगे, इसलिए राम मंदिर में इतनी बड़ी मूर्ति लगाने पर विचार हो रहा है जिससे श्रद्धालु 30 से 35 फीट दूरी से ही बालरूप के भगवान राम के चरण और आंख देख पाएं। श्रद्धालु और रामलला की आंख एक लाइन में हो। इसके अतिरिक्त राम मंदिर ऐसा बन रहा है कि रामनवमी के दिन सूर्य का प्रकाश सीधे भगवान राम के मस्तक को प्रकाशमान करे। इसके लिए भी मूर्ति पेडेस्टल के साथ लगभग साढ़े आठ फिट ऊंची होनी चाहिए।

बता दें कि इससे पहले त्रिपुरा में भाजपा की जन विश्वास यात्रा की सभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तीथि का घोषणा किया है। उन्होंने कहा कि 1 जनवरी 2024 तक मंदिर तैयार हो जाएगा। उन्होंने त्रिपुरा के लोगों से टिकट बुक कराने के लिए भी कहा।
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इसके अतिरिक्त आपको हम बता दें कि दिसंबर 2023 तक रामलाल की गर्भ गृह में प्राण प्रतिष्ठा किया जा सके, इसके लिए परकोटे के निर्माण के लिए नींव बनाने के लिए खुदाई आरंभ हो चुकी है। अर्थात रिटेनिंग वॉल के निर्माण का कार्य अब संचालित है। परकोटा की ऊंचाई भू स्तर से 14 फिट होगी और आठ एकड़ में निर्माण किया। परकोटा का निर्माण दक्षिण भारत के ग्रेनाइट पत्थरों से किया जाना है।

यही नहीं मंदिर के विशाल परिसर में छोटे बिजलीघर और परकोटे में 6 मंदिरों की स्थापना की स्वीकृति भी बैठक में मिली है। परकोटे के बाहर भगवान राम के जीवन पर आधारित 100 प्रसंग उकेरे जाएंगे। अगली बैठक में प्राण प्रतिष्ठा की व्यवस्था और स्वरूप पर चर्चा होगी। 14 जनवरी के बाद कौन सा मुहूर्त सबसे पहले आता है उसे देखा जाएगा।

Ayodhya Ram Mandir
Ayodhya Ram Mandir Nirman

श्री राम मंदिर निर्माण कार्य की वर्तमान परिस्थिति की जानकारी देने हेतु बता दें कि अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर बन रहे भव्य मंदिर के भूतल निर्माण का कार्य 62 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। निर्माण पूरा होते ही रामलला विराजमान हो जाएंगे। इसके पश्चात से ही रामलला के दर्शन के लिए मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।

यह भी बता दें कि कार्यदायी संस्था एनएंडटी को इसी वर्ष अक्टूबर महीने की डेडलाइन दी है। अर्थात 2 महीने का बफर टाइम मार्जिन रखा गया है। और इस गति से कार्य को पूर्ण करने के लिए कार्यदायी संस्था 800 से अधिक श्रमिकों की सहायता से दिन रात कार्य को सम्पन्न करवाने में जुटी हुई है।

Ayodhya Ram Mandir
Ayodhya Ram Mandir Nirman

निर्माण कार्य की अधिक जानकारी हेतु बता दें कि रामलला के मंदिर के अष्ट कोणीय गर्भगृह में मकराना के आठ खंभे लगेंगे जिनकी ऊंचाई लगभग 20 फिट होगी। यह गर्भगृह पूरी तरह से मकराना के श्वेत मार्बल से ही निर्मित होंगे। इसकी छत, फर्श व रोशनदान भी मकराना मार्बल की ही होगी। भूतल में कुल 161 खंभे लगाए जाने है जिनमें लगभग 56 खंभे बंशी पहाड़पुर के लाल बलुआ पत्थर के हैं। गर्भगृह में लगने वाले मकराना के श्वेत मार्बल के खंभो की ऊंचाई 18 फिट से ऊपर आ गयी है।

महत्वपूर्ण यह है कि मंदिर में लगभग 20 फिट ऊंचे खंभे लगाए जाने है और एक खंभे के नौ भाग है जो कि एक दूसरे के ऊपर खांचे में बैठाए जाते है। रामजन्मभूमि में कार्यदायी संस्था एलएण्डटी के साथ पर्यवेक्षण का दायित्व संभाल रही टाटा इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी (टीईसी) के अनुसार राम मंदिर के गर्भगृह निर्माण के साथ उसके दाएं व बाएं प्रार्थना व ध्यान मंडप का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इन मंडपों का निर्माण बंशीपहाड़पुर के गुलाबी बलुआ पत्थर से ही कराया जा रहा है।

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इसके अतिरिक्त आपको हम बता दें कि रामलला के दिव्य मंदिर के निर्माण कराने के साथ 70 एकड़ परिसर में प्रस्तावित योजनाओं के निर्माण को लेकर छह महीने की अग्रिम व्यवस्था पर कार्य संचालित है। राम मंदिर निर्माण के साथ पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में देश की सभी श्रेष्ठतम एजेंसियों का सहयोग लिया जा रहा है जिससे किसी भी काम में गुणवत्ता की दृष्टि से कोई कमी ना रह जाए।

वर्तमान समय में तीर्थ यात्री सुविधा केंद्र के लिए नींव खनन का कार्य भी खरमास लगने से पहले ही आरंभ हो गया। इस नींव खनन का कार्य रामलला के दर्शन के वापसी के मार्ग में पड़ने वाले अरविंदो आश्रम के सामने और अंगद टीला के निकट कराया जा रहा है। यहां पहले चरण में 25 हजार श्रद्धालुओं की सुविधाओं की दृष्टि से यात्री काम्प्लेक्स का निर्माण होगा जिसमें ए, बी व सी श्रेणी के विश्रामालय बनाए जाएंगे। यहां इन यात्रियों के लिए निःशुल्क लॉकर व डारमेट्री की भी सुविधा उपलब्ध होगी जिसमें रेलवे अथवा हवाई यात्रा से सीधे आने वाले दर्शनार्थियों के सामानों को रखने की व्यवस्था होगी। अभी श्रद्धालुओं को सामान रखने के लिए मजबूरन निजी लाकरों का प्रयोग करना पड़ रहा है और मनमानी कीमत भी चुकानी पड़ रही है।

Ayodhya Ram Mandir
Ayodhya Ram Mandir

रामजन्मभूमि में रामलला के दिव्य मंदिर निर्माण के लिए पांच अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भूमि पूजन किया था। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी स्मृति के लिए यहां ‘परिजात’ के पौधे का भी रोपण विशेष विधि से किया था। प्रधानमंत्री मोदी की इच्छा से लगाए गये परिजात के पश्चात परिसर में 88 रामायण कालीन पौधरोपण की योजना बनी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योजना को साकार रूप देने के लिए वन विभाग को इस कार्य का दायित्व दिया है।
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ज्ञातव्य है कि रामजन्मभूमि की तलहटी में सरयू नदी के प्रवाह के कारण 11 वीं सदी में मंदिर का निर्माण टीले पर हुआ था। इस परिसर में कुबेर टीला समेत नल-नील व अंगद टीला भी है। इन सभी टीलों को लैंड स्केप के रुप में सुसज्जित कर प्राकृतिक सौंदर्य को निखारा जाएगा। बताते चले कि 70 एकड़ परिसर में से 20 एकड़ में ही भवनों का निर्माण होगा और शेष 50 एकड़ हरियाली रहेगी।
मित्रों यदि उपरोक्त दी हुई श्री राम मंदिर निर्माण की जानकारी आपको पसंद आई हो तो कमेंट बाॅक्स में जय श्री राम अवश्य लिखें एवं यदि कोई सुझाव हो वह भी बताएं।
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