अयोध्या दीपोत्सव 2026: 30 लाख दीप और 2,100 ड्रोन शो

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अयोध्या, 6 नवंबर 2026। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या एक बार फिर इतिहास रचने की तैयारी में है। दीपों के महापर्व दीपावली से पहले रामनगरी में दसवें दीपोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष 7 नवंबर को होने वाले मुख्य कार्यक्रम में सरयू नदी के किनारे स्थित 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीप जलाने का लक्ष्य रखा गया है। लाखों दीपों की रोशनी से राम की पैड़ी और सरयू का तट एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं।

इस बार का दीपोत्सव केवल दीपों तक सीमित नहीं रहेगा। आयोजन में 2,100 स्वदेशी ड्रोन के माध्यम से आसमान में रामायण के विभिन्न प्रसंगों को प्रदर्शित करने की योजना है। इसके साथ धार्मिक अनुष्ठान, सरयू महाआरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम, रामलीला और आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

7 नवंबर को 30 लाख दीयों से जगमगाएगी रामनगरी, 56 घाटों पर होगा भव्य आयोजन;
7 नवंबर को 30 लाख दीयों से जगमगाएगी रामनगरी, 56 घाटों पर होगा भव्य आयोजन;

7 नवंबर को होगा दसवें दीपोत्सव का मुख्य आयोजन

अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी। तब से हर वर्ष इस आयोजन का स्वरूप और विस्तार बढ़ता गया है। वर्ष 2026 में दीपोत्सव का दसवां संस्करण आयोजित किया जा रहा है।

इस वर्ष पांच दिवसीय आयोजन 5 नवंबर से शुरू हुआ है और 9 नवंबर तक विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। हालांकि, 7 नवंबर मुख्य दीपोत्सव दिवस होगा, जब राम की पैड़ी सहित सरयू नदी के 56 घाटों पर बड़े स्तर पर दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे।

पिछले वर्ष 2025 में अयोध्या में 26.17 लाख दीप जलाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया था। इस बार उस उपलब्धि को आगे बढ़ाते हुए 30 लाख से अधिक दीप जलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ध्यान देने वाली बात है कि 30 लाख दीप अभी आयोजन का लक्ष्य है, पूरा हो चुका रिकॉर्ड नहीं।

2,100 ड्रोन से आसमान में दिखाई देगी रामायण

इस बार दीपोत्सव का सबसे आधुनिक आकर्षण 2,100 स्वदेशी ड्रोन का शो होगा। इसके माध्यम से आसमान में भगवान श्रीराम के जीवन और रामायण से जुड़े विभिन्न दृश्यों को आकर्षक आकृतियों में प्रदर्शित किया जाएगा।

ड्रोन शो के अलावा आयोजन में लेजर शो और प्रोजेक्शन मैपिंग भी शामिल होंगे। जानकारी के अनुसार, लगभग आठ मिनट का लेजर शो और 20 मिनट की प्रोजेक्शन मैपिंग प्रस्तुति प्रस्तावित है।

इस तकनीकी प्रस्तुति का उद्देश्य धार्मिक परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक विशेष अनुभव देना है।

56 घाटों पर सजेंगे लाखों दीप, 35 हजार विद्यार्थी करेंगे सहयोग

दीपोत्सव की तैयारियां राम की पैड़ी और सरयू नदी के अन्य घाटों पर तेजी से चल रही हैं। इस बार 56 घाटों पर दीप सजाने की व्यवस्था की जा रही है।

इस विशाल आयोजन में अयोध्या के विभिन्न कॉलेजों के लगभग 35,000 विद्यार्थियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। स्वयंसेवक घाटों पर दीपों को निर्धारित क्रम में सजाने और आयोजन की तैयारियों में सहयोग कर रहे हैं।

इतने बड़े स्तर पर दीप प्रज्ज्वलन के लिए दीपों की व्यवस्था, तेल, बाती, घाटों की सफाई और स्वयंसेवकों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा।

2,147 लोगों की सहभागिता से होगी सरयू महाआरती

दीपोत्सव के दौरान सरयू नदी के तट पर महाआरती का भी विशेष आयोजन प्रस्तावित है। इस बार सरयू महाआरती में 2,147 प्रतिभागियों के शामिल होने की योजना है।

वैदिक मंत्रोच्चार और आरती के साथ सरयू का तट भक्ति और आध्यात्मिकता के वातावरण से भर उठेगा। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालु इस विशेष आयोजन के साक्षी बन सकेंगे।

22 झांकियों में दिखेगी रामायण की कहानी

इस वर्ष दीपोत्सव में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को प्रदर्शित करने के लिए 22 आकर्षक झांकियों की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

इन झांकियों में रामायण के सातों कांडों पर आधारित दृश्य शामिल होंगे। राम रथ, राम दरबार और पुष्पक विमान जैसी प्रस्तुतियां आयोजन को विशेष बनाएंगी।

इसके अलावा रामकथा पार्क में सांस्कृतिक कार्यक्रम और देश-विदेश की रामलीला मंडलियों की प्रस्तुतियां भी होंगी। दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, नेपाल, लाओस और थाईलैंड की रामलीला मंडलियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

दीपोत्सव से कुम्हारों और स्थानीय परिवारों को मिलेगा रोजगार

अयोध्या का दीपोत्सव धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन होने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।

इस वर्ष अयोध्या और बाराबंकी की 25 ग्रामीण महिलाओं के समूह को 1.60 लाख दीपों की आपूर्ति के लिए लगभग 12.8 लाख रुपये का ऑर्डर दिया गया है। इसके अलावा अक्टूबर 2026 तक 197 कुम्हारों को इलेक्ट्रिक चाक उपलब्ध कराए जाने की जानकारी सामने आई है।

इससे मिट्टी के दीप बनाने वाले कारीगरों को बड़े स्तर पर काम मिलने के साथ उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। दीपोत्सव के माध्यम से स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यवसायों को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए तीन स्तरीय व्यवस्था

मुख्य आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं।

7 नवंबर को मुख्य कार्यक्रम के दौरान रामपथ और धर्मपथ पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रखने की व्यवस्था की गई है। आयोजन क्षेत्र में तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू करने और प्रमुख रास्तों तथा संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल तैनात करने की जानकारी दी गई है।

श्रद्धालुओं से अपील है कि अयोध्या पहुंचने से पहले प्रशासन की ओर से जारी नवीनतम यातायात एडवाइजरी और प्रवेश संबंधी निर्देश अवश्य जांच लें।

2017 से 2026 तक कैसे बदला अयोध्या का दीपोत्सव?

अयोध्या दीपोत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में लगभग 1.71 लाख दीपों के साथ हुई थी। इसके बाद प्रत्येक वर्ष आयोजन का विस्तार हुआ और दीपों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई।

वर्षदीपोत्सव की उपलब्धि
2017लगभग 1.71 लाख दीप
202526.17 लाख दीप
202630 लाख से अधिक दीपों का लक्ष्य

रामनगरी में आस्था, संस्कृति और तकनीक का संगम

अयोध्या का दसवां दीपोत्सव भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आधुनिक तकनीक के संगम के रूप में सामने आ रहा है। एक ओर सरयू के घाटों पर लाखों मिट्टी के दीप जलाने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर ड्रोन, लेजर और डिजिटल प्रस्तुतियां इस आयोजन को नया स्वरूप देने जा रही हैं।

7 नवंबर को होने वाले मुख्य आयोजन पर देशभर की निगाहें रहेंगी। यदि 30 लाख से अधिक दीपों का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा होता है, तो अयोध्या एक बार फिर दीपोत्सव के इतिहास में नया अध्याय जोड़ सकती है।

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