काशी के नए सिग्नेचर ब्रिज को मिला ‘नमो ब्रिज’

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वाराणसी। धर्म और आध्यात्मिकता की नगरी काशी के बुनियादी ढांचे को एक नई पहचान मिलने जा रही है। गंगा नदी पर मालवीय पुल (पुराना राजघाट पुल) के ठीक बगल में निर्माणाधीन नए सिग्नेचर डबल-डेकर ब्रिज को अब ‘नमो ब्रिज’ (Namo Bridge) के नाम से जाना जाएगा। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 31 अक्टूबर 2026 को वाराणसी दौरे के दौरान इस महत्वपूर्ण परियोजना का निरीक्षण करने के बाद इसके नाम की घोषणा की।

यह घोषणा काशी के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि बहुत से लोग अभी तक इस बात से अनजान हैं कि शहर में बन रहे नए सिग्नेचर ब्रिज को एक नया नाम दिया गया है। यह पुल मौजूदा मालवीय पुल से अलग एक नई परियोजना है, जिसका उद्देश्य वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में सड़क एवं रेल यातायात की क्षमता को बढ़ाना है।

क्या है नमो ब्रिज की सबसे बड़ी खासियत?

नमो ब्रिज की सबसे बड़ी विशेषता इसका डबल-डेकर डिजाइन है। इसे सड़क और रेलवे दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

परियोजना के प्रस्तावित डिजाइन के अनुसार:

  • ऊपरी डेक पर छह लेन का हाईवे बनाया जाएगा।
  • निचले डेक पर चार रेलवे ट्रैक होंगे।
  • पुल की कुल लंबाई इसके एप्रोच मार्गों सहित लगभग 2.5 किलोमीटर होगी।
  • यह पुल गंगा नदी पर मौजूदा मालवीय पुल के समानांतर बनाया जा रहा है।
  • इसे काशी रेलवे स्टेशन से जोड़ने की योजना है।

इस आधुनिक संरचना के बनने से एक ही पुल के माध्यम से सड़क और रेल परिवहन की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।

Varanasi’s New Signature Bridge Named ‘Namo Bridge
Varanasi’s New Signature Bridge Named ‘Namo Bridge

मालवीय पुल के बगल में क्यों बनाया जा रहा है नया पुल?

वाराणसी का ऐतिहासिक मालवीय पुल, जिसे पहले डफरिन ब्रिज और स्थानीय स्तर पर राजघाट पुल भी कहा जाता है, वर्ष 1887 में बनाया गया था। यह पुल लंबे समय से शहर के लिए सड़क और रेल कनेक्टिविटी का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है।

समय के साथ इस रेल कॉरिडोर पर यातायात का दबाव बढ़ा है। बढ़ती यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को देखते हुए अतिरिक्त रेल लाइनों और नए पुल की आवश्यकता महसूस की गई।

नया नमो ब्रिज इसी जरूरत को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। इससे वाराणसी से पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के बीच रेल परिचालन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

₹1,201 करोड़ से अधिक की लागत से हो रहा निर्माण

इस ब्रिज का निर्माण रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) और GPT Infraprojects Limited के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से किया जा रहा है। निर्माण अनुबंध की कीमत लगभग ₹1,201.35 करोड़ बताई गई है।

यह परियोजना वाराणसी–पंडित दीनदयाल उपाध्याय मल्टीट्रैकिंग योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अक्टूबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस व्यापक मल्टीट्रैकिंग परियोजना को लगभग ₹2,642 करोड़ की अनुमानित लागत से मंजूरी दी थी।

दोनों आंकड़े अलग-अलग दायरे से संबंधित हैं। ₹1,201.35 करोड़ नए पुल के निर्माण अनुबंध की कीमत है, जबकि ₹2,642 करोड़ व्यापक मल्टीट्रैकिंग परियोजना की स्वीकृत अनुमानित लागत है।

बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों की कनेक्टिविटी को मिलेगा फायदा

नमो ब्रिज के निर्माण से केवल वाराणसी को ही नहीं, बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों की रेल एवं सड़क कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

परियोजना से रेल माल परिवहन क्षमता में लगभग 27.83 मिलियन टन प्रति वर्ष की अतिरिक्त क्षमता जुड़ने का अनुमान है। इससे मालगाड़ियों के संचालन में सुविधा और मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

इसके अतिरिक्त, काशी रेलवे स्टेशन, नमो घाट और काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर आने-जाने वाले यात्रियों और पर्यटकों के लिए भी बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होने की उम्मीद है।

36 महीने में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य

31 अक्टूबर को निरीक्षण के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने निर्माण एजेंसी को काम में तेजी लाने और परियोजना को 36 महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया। इससे पहले परियोजना के लिए 48 महीने की समयसीमा निर्धारित थी।

निर्माण कार्य अभी जारी है। पुल के तैयार होने के बाद यह काशी के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण पहचान बन सकता है।

काशी के विकास में जुड़ेगा एक नया अध्याय

बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी अपनी प्राचीन विरासत के साथ तेजी से आधुनिक परिवहन सुविधाओं की ओर बढ़ रही है। नमो ब्रिज इसी बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

एक ओर 1887 में बना ऐतिहासिक मालवीय पुल काशी की पहचान बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर उसके बगल में तैयार हो रहा नया नमो ब्रिज भविष्य की सड़क और रेल जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

नोट: नमो ब्रिज अभी निर्माणाधीन परियोजना है। नाम की घोषणा हो चुकी है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि पुल यातायात के लिए खोल दिया गया है।

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