भारत नेपाल रेल सेवा लिखेगी दोस्ती का नया अध्याय, जानें कैसी है ट्रेन व कितना है किराया?

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नित्य नवीन ऊंचाईयों को छूने वाली भारतीय रेलवे की उपलब्धियों में एक और कड़ी जुड़ गई है। तथा भारत से नेपाल के संबंधों को और मजबूती प्रदान करने के क्रम में भारत और नेपाल के मध्य रेलवे अब गतिमान हो गई है।

India-Nepal Train latest News in Hindi: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने संयुक्‍त रूप से भारत और नेपाल के मध्य रेल सेवा को बीते शनिवार (2 अप्रैल 2022) से आरंभ किया।

Nepal Train

आइए पहले आपको हम भारत नेपाल के मध्य में चलने वाली ट्रेन के संक्षिप्त इतिहास की जानकारी देते हैं।
बता दें कि भारत नेपाल रेलवे का इतिहास 85 वर्ष पुराना है। 20 दिसंबर 1937 को जयनगर से जनकपुरधाम होते हुए बिजलपुरा तक नैरो गेज रेल चली थी। इस रेल चलाने का उद्देश्य नेपाल की जंगल से सखुआ लकड़ी की ढुलाई करना था। उस समय भारत में बिट्रिश का राज्य और नेपाल में राजशाही था।

दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह ने नेपाल राजा को जयनगर में नेपाली स्टेशन के लिए 100 वर्ष के लीज पर भूमी दी थी। इसके पश्चात स्टेशन का निर्माण हुआ। इस समयावधि में वर्ष 1961 तक केवल माल ढुलाई का ही कार्य होता रहा।

नेपाल में वर्ष 1961 के विवाह पंचमी के दिन अर्थात आज से 61 साल पहले विवाह पंचमी के दिन ही जयनगर से जनकपुरधाम से बिजलपुरा तक यात्री सेवा बहाल हुई थी। इससे यात्रियों को आने-जाने की सुविधा भी मिली।

इस यात्री सेवा बहाल करने के लिए नेपाल रेलवे को भारत सरकार ने तीन स्टीम इंजन व कोच दिया। स्टीम इंजन का नाम राम, सीता, गुहेश्वरी के नाम से था।
इसके पश्चात 1994 अर्थात 28 वर्ष पहले भारत सरकार ने दो डीजल इंजन तथा कोच दिया। राइट्स कंपनी के इंजीनियर तथा लोको पायलट एक वर्ष नेपाल में रहकर नेपाली रेलवे कर्मचारी को प्रशिक्षण दिया।

परंतु इस संपर्क सूत्र को 2001 में नेपाल में बाढ़ के पश्चात निलंबित कर दिया गया था। तत्पश्चात स्थित सामान्य होने पर जयनगर से नेपाल के जनकपुर तक वर्ष 2014 तक नेपाली ट्रेनों का परिचालन हुआ। धीमी गति से चलने के कारण लोग खिड़की और दरवाजों पर लटक कर यात्रा करते थे।

Janakpur Station Old

बता दें कि भारत सरकार ने मैत्री योजना के अंतर्गत जयनगर से नेपाल के वर्दीवास तक 69.5 किलोमीटर की दूरी में नैरो गेज ट्रैक को मीटर गेज में बदलने व नई रेल लाइन बिछाने के लिए 548 करोड़ रुपये स्वीकृत किए। यह परियोजना तीन चरणों में बांटी गई है। इसके अंतर्गत जयनगर से कुर्था की रेल सेवा के लिए गत बीते जुलाई 2021 में स्पीड ट्रायल किया गया था। अब इस रेलखंड पर परिचालन आरंभ हो गया है।

जानकारी के लिए बता दें कि कोंकण रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने 1600 एचपी डेमू यात्री रेक के दो सेट और दो संचालित रेल सेवाओं की आपूर्ति की है। इन 2 डेमू रेक में नॉन-एसी कोचों के अतिरिक्त प्रत्येक में 2 एसी कोच हैं। ये 2 रेक पिछले वर्ष सितंबर में नेपाल को सौंपे गए थे। जिसे की नेपाल सरकार ने लगभग 1 अरब नेपाली रुपये में खरीदे हैं।

इस प्रकार से वर्ष 2014 तक भारत नेपाल के मध्य जिस सकरी लाइन पर रेल चलती थीं। उसपर आज पहली ब्रॉड गेज यात्री रेल सेवा आरंभ हो चुकी है। भारतीय रेलवे नेपाल रेलवे कंपनी के साथ जानकारी और संचालन तथा रखरखाव प्रक्रियाओं को साझा करने के साथ-साथ नेपाल के अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करके बीजी सेवा चलाने में नेपाल को पूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है।

अब यदि आपको इस रेल परियोजना की अधिक जानकारी दें तो बता दें कि भारत-नेपाल के बीच बनी इस रेलवे लाइन के निर्माण में लगभग 800 करोड़ रुपए की लागत आई है। जहां जयनगर से बीजलपुरा और बर्दिबास तक 69.08 किलोमीटर परियोजना के अंर्तगत पहले चरण में लगभग 36 किलोमीटर लंबी जयनगर से जनकपुरधाम-कुर्था रेलखंड पर ट्रेन का परिचालन आरंभ हुआ। कुर्था से बिजलपुरा तक लगभग 18 किलोमीटर लंबे रेलखंड का भी कार्य पूरा हो चुका है। जबकि नेपाल सरकार बिजलपुरा से बर्दिबास तक 16 किलोमीटर की रेलवे लाइन शीघ्र ही करवा देगी।

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अब यदि इस वर्तमान में संचालित भारत नेपाल रेल सेवा के रूट व स्टॉपेज की जानकारी दें तो आपको बता दें कि इसमें भारत के जयनगर से नेपाल के इनरबा की दूरी 4 किमी है। इसके पश्चात इनरबा से खजुली 4.6 किमी, खजुली से महिनाथपुर (हॉल्ट) 6.9 किमी, महिनाथपुर से वेदही 4.4 किमी, वेदही से परवाहा (हॉल्ट) 3.07 किमी, परवाहा से जनकपुर (हॉल्ट) 7.9 किमी व जनकपुर से कुर्था 5.4 किमी है। तथा वर्तमान में यह रेल कुल लगभग 36 तक परिचालित है। ट्रेन अभी जयनगर से कुर्था के बीच चलेगी। हालांकि, आने वाले दिनों में इसे वर्दीवास तक बढ़ाया जाना है।

आपको इसके मूल्य अथवा किराए की जानकारी हेतु बता दें कि भारत से नेपाल जाने के लिए अब मात्र 12.50 रुपए लगेंगे। जयनगर से इनरवा जाने का किराया 12.50 रुपए, खजुरी जाने के लिए 15.60 रुपए, महिनाथपुर जाने के लिए 21.87 रुपए, वैदेही जाने के लिए 28.125 रुपए, परवाहा जाने के लिए 34 रुपए और जनकपुर जाने के लिए 43.75 रुपए और कुर्था जाने के लिए 56.25 रुपए लगेंगे।

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महत्वपूर्ण है कि पाकिस्‍तान व बांग्‍लादेश के पश्चात अब भारत और नेपाल के मध्य भी ट्रेन सेवा आरंभ हो गई है। बिहार के मधुबनी जिला स्थित जयनगर से नेपाल के जनकपुरधाम होते हुए कुर्था तक ट्रेन जाएगी। शनिवार को दिल्ली में भारत व नेपाल के प्रधानमंत्री संयुक्त रूप से इसका वर्चुअल उद्घाटन किया। मुख्य उद्घाटन समारोह जयनगर में हुआ। इस ट्रेन सेवा से दोनों देशों के यात्रियों को लाभ होगा।

परंतु यदि आप भारत अथवा नेपाल के नागरिक नहीं हैं यह ट्रेन आपके लिए नहीं है। क्योंकि इस ट्रेन में भारत व नेपाल को छोड़ किसी अन्‍य देश के नागरिक यात्रा नहीं कर सकेंगे।

इसके अतिरिक्त यह भी बता दें कि जो यात्री यात्रा कर सकते हैं उन यात्रियों को अपने साथ पासपोर्ट रखना अनिवार्य नहीं है, परंतु उन्‍हें फोटोयुक्‍त वैध पहचान पत्र साथ में रखना होगा।

जैसे कि वैध राष्ट्रीय पासपोर्टभारत सरकार/ राज्य सरकार/ केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन द्वारा कर्मचारियों के लिए जारी फोटोयुक्त पहचान पत्र।भारतीय चुनाव आयोग द्वारा जारी फोटो पहचान पत्र।नेपाल स्थित भारतीय दूतावास/ भारतीय महावाणिज्य दूतावास द्वारा जारी इमरजेंसी प्रमाण पत्र या परिचय प्रमाण।65 वर्ष से अधिक और 15 वर्ष से कम आयु वर्ग के लोगों के लिए उम्र और पहचान की पुष्टि करनी होगी जिसके लिए फोटोयुक्त पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, सीजीएचएस कार्ड, राशन कार्ड आदि आवश्यक होगा।

Nepal

इसके अतिरिक्त आपको बता दें कि भारत नेपाल के इस ट्रेन सेवा पर पूरा नियंत्रण नेपाल रेलवे का होगा। इसका परिचालन अभी कोंकण रेलवे के कर्मी नेपाली रेल कर्मियों के साथ कर रहे हैं। कोंकण रेलवे के कर्मी लगभग छह महीने तक नेपाली रेलकर्मियों को ट्रेन परिचालन की ट्रेनिंग देंगे।

जानकारी के लिए बता दें कि आठ वर्ष से इस रेलखंड पर गाड़ियों का परिचालन नहीं होने से लोगों के पास नेपाल जाने के लिए सड़क मार्ग ही एकमात्र विकल्प था। सड़क मार्ग से लोगों को कई प्रकार की अवरोध का सामना करना पड़ता था। खर्च भी अधिक होता था। जयनगर से जनकपुर जाने में अभी दो सौ रुपये से अधिक खर्च हो जाते हैं। वाहन परावर्तन भी करना पड़ता है। परंतु ट्रेन से मात्र 43.75 रुपये में लोग पहुंच जाएंगे।

सबसे महत्वपूर्ण है कि इस ट्रेन के आरंभ होने से न केवल व्‍यापार बढ़ेगा, अपितु धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। भारत के लोगों के लिए जनकपुर में माता जानकी मंदिर में दर्शन करना सरल हो जाएगा। चैत नवरात्र के समयावधि इस ट्रेन सेवा के कारण जनकपुर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की संभावना है। भारत और नेपाल के व्यापारी अब सरलता से सामान खरीदकर आ-जा सकेंगे।

मधुबनी व आसपास में कपड़ा व खाद्यान्न के थोक मार्केट हैं, जहां का व्यापार नेपाली ग्राहकों पर टिका है। प्रतिदिन दो से तीन करोड़ का व्यवसाय होता है, जिसके की अब डेढ़ गुना बढ़ने का अनुमान है। ट्रेन में व्‍यावसायिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भारत के जयनगर एवं नेपाल के इनरवा स्टेशन पर कस्टम चेकिंग प्वाइंट भी बनाए गए हैं।

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महत्वपूर्ण है कि 8 वर्षों पश्चात भारत-नेपाल के मध्य रेल सेवा आरंभ होने से दोनों देशों के इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों से नवीन अध्याय जुड़ गया है। जो सांस्कृतिक व धार्मिक तौर पर जुड़े हिंदूत्व की दो धरा को पुनः एक करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देगा।

मित्रों यदि आपको उपरोक्त दी हुई भारत नेपाल रेल सेवा की जानकारी पसंद आई हो तो कमेंट बाॅक्स में अपने गांव जिले अथवा नगर का नाम अवश्य लिखें।

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