होर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट के बीच भारत कैसे संभाल रहा है तेल संकट? जानिए प्रधानमंत्री मोदी की पूरी रणनीति

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात प्रभावित होने से पूरी दुनिया के सामने ऊर्जा संकट की चुनौती खड़ी हो गई है। दुनिया के प्रमुख तेल आयातक देशों में शामिल भारत के लिए यह स्थिति काफी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में समुद्री रास्तों में रुकावट का असर देश की अर्थव्यवस्था, पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति और रसोई गैस पर पड़ सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए वैकल्पिक देशों से तेल खरीदने, घरेलू रिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ाने, रसोई गैस की आपूर्ति सुरक्षित रखने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास तेज करने जैसे कदम उठाए हैं।

क्या है होर्मुज़ जलडमरूमध्य और भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

होर्मुज़ जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।

दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत पेट्रोलियम आपूर्ति सामान्य परिस्थितियों में इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और ईरान जैसे देशों से तेल तथा गैस की आपूर्ति के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर रहा है। मार्च 2026 में संसद में दी गई सरकारी जानकारी के अनुसार, संकट से पहले भारत के लगभग 45 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात इसी मार्ग से होता था।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट के बीच भारत कैसे संभाल रहा है तेल संकट? जानिए प्रधानमंत्री मोदी की पूरी रणनीति
होर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट के बीच भारत कैसे संभाल रहा है तेल संकट? जानिए प्रधानमंत्री मोदी की पूरी रणनीति

1. दूसरे देशों से तेल खरीदने की रणनीति

भारत सरकार ने तेल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए दूसरे देशों से खरीद बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।

भारत अब रूस, अमेरिका और अन्य तेल उत्पादक देशों से भी कच्चा तेल खरीद रहा है।

12 मार्च 2026 को संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, भारत ने तेल आपूर्ति करने वाले देशों की संख्या बढ़ाकर 40 कर दी है।

सरकारी जानकारी के मुताबिक, संकट के शुरुआती दौर में होर्मुज़ के बाहर से आने वाले तेल की हिस्सेदारी लगभग 55 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत हो गई थी।

2. भारतीय तेल रिफाइनरियों की भूमिका

भारत के पास बड़ी तेल शोधन क्षमता है। देश की रिफाइनरियां आयात किए गए कच्चे तेल से पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन जैसे उत्पाद तैयार करती हैं।

संकट के दौरान सरकार ने रिफाइनरियों को अधिकतम क्षमता से काम करने और ईंधन उत्पादन बनाए रखने पर जोर दिया।

इससे घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलती है।

3. रसोई गैस की आपूर्ति बचाने के लिए कदम

इस संकट का सबसे बड़ा असर रसोई गैस की आपूर्ति पर पड़ने की आशंका थी।

भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है। इसलिए सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने और दूसरे देशों से गैस खरीदने के प्रयास किए।

12 मार्च 2026 को संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, सरकारी निर्देशों के बाद पांच दिनों में घरेलू एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

इसके साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी गई और व्यावसायिक गैस वितरण को नियंत्रित किया गया।

4. पेट्रोल और डीजल की निगरानी

सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर नजर रखने के लिए चौबीसों घंटे निगरानी व्यवस्था बनाई।

इसका उद्देश्य देशभर में पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन की आपूर्ति को सुचारु रखना था।

राज्य सरकारों को भी जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के निर्देश दिए गए। सरकार ने नागरिकों से घबराकर पेट्रोल-डीजल खरीदने से बचने की अपील की।

5. प्रधानमंत्री मोदी की उच्चस्तरीय बैठकें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया के हालात और भारत की ऊर्जा सुरक्षा की समीक्षा के लिए सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की उच्चस्तरीय बैठकों की अध्यक्षता की।

30 जुलाई 2026 की बैठक में पेट्रोलियम उत्पादों, रसोई गैस, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

इसके साथ ही विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने पर भी चर्चा की गई।

6. भारत के सामने अभी भी क्या चुनौतियां हैं?

सरकार के प्रयासों के बावजूद भारत के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां हैं।

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि।
  • समुद्री जहाजों के बीमा और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी।
  • रसोई गैस और प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता।
  • लंबे समय तक संकट जारी रहने पर महंगाई का दबाव।
  • आपातकालीन तेल भंडार की क्षमता बढ़ाने की जरूरत।

क्या भारत में पेट्रोल-डीजल खत्म हो सकता है?

होर्मुज़ जलडमरूमध्य में संकट का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल और डीजल अचानक खत्म हो जाएंगे।

भारत के पास दूसरे देशों से तेल खरीदने, घरेलू रिफाइनरियों में उत्पादन करने और वैकल्पिक समुद्री रास्तों का इस्तेमाल करने के विकल्प हैं।

हालांकि, अगर संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो तेल की कीमतों और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है

नोट: प्रकाशित करने से पहले नवीनतम सरकारी आंकड़ों और घटनाओं की पुष्टि जरूर करें। ऊपर के दोनों लेख एक ही विषय के स्वतंत्र रूप से लिखे गए संस्करण हैं।

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