चक्रवात मुरासु का आंध्र प्रदेश में लैंडफॉल
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नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ (Cyclone Murasu) ने दक्षिण भारत के कई राज्यों में मौसम को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह तूफान उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका है। वहीं केरल, तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
आंध्र प्रदेश के तट पर होगा चक्रवात का लैंडफॉल
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, चक्रवात मुरासु के 2 नवंबर की देर रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच आंध्र प्रदेश के तट को पार करने की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक रहने का अनुमान है।
तटीय आंध्र प्रदेश के निचले इलाकों में समुद्री लहरों और जलभराव का खतरा भी बना हुआ है। प्रशासन की ओर से तटीय क्षेत्रों में सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

केरला के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
चक्रवात का सीधा लैंडफॉल केरला में नहीं होगा, लेकिन इसके प्रभाव से राज्य के कई हिस्सों में बारिश, आकाशीय बिजली और तेज हवाएं चलने की संभावना है।
2 नवंबर को पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड में येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 3 और 4 नवंबर को भी कुछ जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। केरल में हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
क्या उत्तर प्रदेश और वाराणसी में भी पड़ेगा असर?
चक्रवात मुरासु को लेकर उत्तर प्रदेश के लोगों के मन में भी सवाल है कि क्या इसका असर पूर्वी उत्तर प्रदेश और वाराणसी तक पहुंचेगा?
मौसम संबंधी मौजूदा पूर्वानुमानों के अनुसार, चक्रवात का मुख्य प्रभाव दक्षिण भारत के तटीय और आसपास के राज्यों तक सीमित रहने की संभावना है। फिलहाल वाराणसी समेत उत्तर प्रदेश के लिए इस चक्रवात के कारण किसी सीधे बड़े प्रभाव या विशेष चक्रवाती चेतावनी की पुष्टि नहीं हुई है।
हालांकि, चक्रवात के आगे बढ़ने और कमजोर होने के बाद देश के अन्य हिस्सों में मौसम की परिस्थितियां बदल सकती हैं। इसलिए आने वाले दिनों में IMD के अपडेट पर नजर रखना जरूरी होगा।
दिल्ली-NCR में क्या बदलेगा मौसम?
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद समेत NCR के इलाकों में भी इस चक्रवात के सीधे प्रभाव की फिलहाल संभावना नहीं जताई गई है।
चूंकि चक्रवात बंगाल की खाड़ी से दक्षिण भारत की ओर बढ़ रहा है, इसलिए दिल्ली-NCR में इसके कारण तूफानी हवाओं या चक्रवात जैसी स्थिति बनने का फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं है। यहां का मौसम स्थानीय मौसमी परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है।
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
मौसम विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को आकाशीय बिजली, तेज हवाओं और भारी बारिश के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। मछुआरों को समुद्र की स्थिति को देखते हुए आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।
कुल मिलाकर, चक्रवात मुरासु का सबसे अधिक खतरा आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में है। केरल और दक्षिण भारत के कुछ अन्य हिस्सों में बारिश का असर देखने को मिल सकता है, जबकि उत्तर प्रदेश, वाराणसी और दिल्ली-NCR में फिलहाल इसके सीधे बड़े प्रभाव का संकेत नहीं है।
Disclaimer: This article is based on available meteorological updates as of November 2, 2026. Weather forecasts and cyclone tracks may change. Readers are advised to follow official IMD bulletins and local disaster management advisories for the latest information.

