Cyclone Arnab: आंध्र प्रदेश में लैंडफॉल के बाद कमजोर पड़ा चक्रवात, ओडिशा से बिहार-UP और दिल्ली तक बारिश का असर;
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नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 2026। बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात अर्नब (Cyclone Arnab) पूर्वी भारत के लिए बड़ी मौसमी चुनौती बनकर सामने आया। 28 अक्टूबर की सुबह इसने आंध्र प्रदेश और यानम तट के पास दस्तक दी। समुद्र में बेहद शक्तिशाली रूप ले चुका यह तूफान तट से टकराने के बाद भी कई घंटों तक अपनी तीव्रता बनाए रहा। इसके कारण आंध्र प्रदेश और ओडिशा में तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश, बाढ़ और बिजली व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा।
हालांकि, अब चक्रवात की ताकत काफी कम हो चुकी है, लेकिन इसका असर पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसके अवशेष मध्य भारत से होते हुए उत्तर और पूर्वी भारत के कई राज्यों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का कारण बन रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 29 अक्टूबर के बुलेटिन के अनुसार, अर्नब का अवशेष दक्षिण छत्तीसगढ़ और दक्षिण ओडिशा के आसपास डिप्रेशन के रूप में मौजूद था।
1. कैसे बना Cyclone Arnab और कितनी तेजी से बढ़ी इसकी ताकत?
चक्रवात अर्नब की शुरुआत 23 अक्टूबर 2026 को दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव वाले क्षेत्र (Low Pressure Area) से हुई थी।
इसके बाद मौसम प्रणाली लगातार मजबूत होती गई।
- 23 अक्टूबर: दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बना।
- 26 अक्टूबर: यह गहरे अवदाब से चक्रवाती तूफान Arnab में परिवर्तित हुआ।
- 27 अक्टूबर: इसकी तीव्रता बढ़कर Very Severe Cyclonic Storm हो गई।
- 28 अक्टूबर: आंध्र प्रदेश और यानम तट पर लैंडफॉल हुआ।
- 29 अक्टूबर: कमजोर होकर डिप्रेशन में बदल गया और दक्षिण छत्तीसगढ़ तथा दक्षिण ओडिशा के आसपास पहुंच गया।
यह 2026 में उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र (बंगाल की खाड़ी और अरब सागर) में बनने वाला पहला चक्रवात बताया गया है।
2. लैंडफॉल के समय कितनी थी हवा की रफ्तार?
चक्रवात अर्नब की सबसे महत्वपूर्ण बात इसकी तेजी से बढ़ती ताकत थी।
लैंडफॉल के दौरान इसकी अधिकतम निरंतर हवा की रफ्तार लगभग 125-135 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जबकि झोंकों की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची।
इसका लैंडफॉल 28 अक्टूबर की रात लगभग 1 बजे शुरू हुआ और सुबह तक तट पार करने की प्रक्रिया पूरी हुई।
इसका केंद्र नरसापुर के आसपास, यानम और काकीनाडा के नजदीकी तटीय क्षेत्र से गुजरा।
आमतौर पर समुद्र से जमीन पर आने के बाद चक्रवात कमजोर होने लगता है, लेकिन अर्नब ने लैंडफॉल के बाद भी करीब छह घंटे तक अपनी तीव्रता बनाए रखी।
3. आंध्र प्रदेश में कितना हुआ नुकसान?
आंध्र प्रदेश इस चक्रवात से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा।
काकीनाडा, विशाखापत्तनम, अनाकापल्ली, कोनसीमा और पश्चिम गोदावरी जैसे इलाकों में तेज हवाओं और भारी बारिश ने जनजीवन प्रभावित किया।
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार:
- चक्रवात से संबंधित घटनाओं में कम से कम छह लोगों की मौत की पुष्टि की खबरें सामने आईं। राज्य से जुड़ी कुछ बाद की रिपोर्टों में संख्या सात भी बताई गई।
- लगभग 15,000 बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए।
- कई क्षेत्रों में बिजली और मोबाइल नेटवर्क सेवाएं प्रभावित हुईं।
- पेड़ गिरने से सड़कों पर आवागमन बाधित हुआ।
- निचले इलाकों में जलभराव हुआ और घरों को नुकसान पहुंचा।
लगभग 1.80 लाख लोगों को आंध्र प्रदेश और ओडिशा में मिलाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था।
राज्य सरकार ने बिजली, सड़क और दूसरी आवश्यक सेवाओं की बहाली के लिए राहत एवं मरम्मत कार्य तेज किए हैं

4. ओडिशा में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें
आंध्र प्रदेश के बाद ओडिशा के दक्षिणी जिलों में चक्रवात के अवशेषों का प्रभाव गंभीर रूप से दिखाई दिया।
गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जैसे जिलों में भारी बारिश से बाढ़ और जलभराव की स्थिति पैदा हुई।
IMD के 29 अक्टूबर के आंकड़ों के अनुसार, 24 घंटे में कुछ स्थानों पर असाधारण बारिश दर्ज की गई:
| स्थान | बारिश |
|---|---|
| पात्रापुर, गंजाम | 546 मिमी |
| सोराडा, गंजाम | 503 मिमी |
| जी. उदयगिरि, कंधमाल | 462 मिमी |
| महेंद्रगढ़, गजपति | 458 मिमी |
| सनाखेमुंडी, गंजाम | 388 मिमी |
| चिकिटी, गंजाम | 309 मिमी |
इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुछ इलाकों में कितनी भीषण बारिश हुई।
रिपोर्टों के अनुसार, गंजाम और गजपति जिलों में 60,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए। कई गांवों में पानी भर गया और कुछ इलाकों का सड़क संपर्क बाधित हुआ।
राज्य सरकार ने NDRF, ODRAF और फायर सर्विस की टीमों को राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया है।
5. क्या तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में भी पड़ा असर?
चक्रवात के तट पार करने के बाद इसका रास्ता उत्तर की तरफ रहा। इसके कारण तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ीं।
तेलंगाना: उत्तरी और पूर्वोत्तर हिस्सों में भारी बारिश का प्रभाव देखा गया। निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय स्तर पर बाढ़ का खतरा बना।
छत्तीसगढ़: दक्षिणी और मध्य क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई। जगदलपुर और बस्तर के आसपास चक्रवात के अवशेषों का प्रभाव रहा। इसके बाद सिस्टम उत्तर छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ा।
6. बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में क्या होगा असर?
चक्रवात के अवशेषों के उत्तर की ओर बढ़ने से पूर्वी भारत के कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां जारी हैं।
बिहार: 30 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। उत्तर बिहार के जिलों में विशेष सतर्कता जरूरी है।
झारखंड: कुछ इलाकों में भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना है।
पश्चिम बंगाल: गंगा के मैदानी इलाकों और तटीय जिलों में बारिश तथा तेज हवाओं का प्रभाव देखने को मिल सकता है।
सिक्किम और उत्तर बंगाल: दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और आसपास के क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी है।
इन क्षेत्रों में निचले इलाकों में जलभराव, नदियों के जलस्तर में वृद्धि और यातायात बाधित होने जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।
7. उत्तर प्रदेश और वाराणसी में कितना असर पड़ेगा?
उत्तर प्रदेश के लिए भी यह मौसम प्रणाली महत्वपूर्ण है।
IMD के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 अक्टूबर को भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना थी। 30 अक्टूबर को पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश का अनुमान जताया गया।
वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर और आसपास के पूर्वांचल क्षेत्रों में मौसम के बदलने, बादल छाने और बारिश की गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है।
हालांकि, हर जिले में एक जैसी बारिश होना जरूरी नहीं है। स्थानीय मौसम की स्थिति और IMD के जिला-स्तरीय पूर्वानुमान के आधार पर ही वास्तविक असर का आकलन किया जाना चाहिए।
8. दिल्ली-NCR तक कैसे पहुंचा चक्रवात का प्रभाव?
चक्रवात अर्नब का प्रभाव केवल समुद्र तट या पूर्वी भारत तक सीमित नहीं रहा। इसके कमजोर अवशेषों और अन्य सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण उत्तर भारत में भी मौसम अस्थिर हुआ है।
30 अक्टूबर के पूर्वानुमान में दिल्ली-NCR, हरियाणा और चंडीगढ़ के कुछ हिस्सों में गरज-चमक, तेज हवाओं और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।
दिल्ली में हवा के साथ बारिश और तापमान में बदलाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि दिल्ली में होने वाली हर बारिश को सीधे Cyclone Arnab का प्रभाव नहीं कहा जा सकता। उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ और दूसरी मौसम प्रणालियां भी इस गतिविधि को प्रभावित कर सकती हैं।
9. क्या पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी होगा असर?
पूर्वोत्तर भारत के लिए भी मौसम की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में बारिश की स्थिति अलग-अलग हो सकती है।
फिलहाल उपलब्ध IMD चेतावनियों में सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में भारी बारिश का उल्लेख स्पष्ट रूप से है। इसका मतलब यह नहीं है कि पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में चक्रवात का समान प्रभाव पड़ेगा।
पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश होने पर भूस्खलन, सड़क संपर्क बाधित होने और नदियों में जलस्तर बढ़ने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
10. क्या फिर से बंगाल की खाड़ी में नया चक्रवात बन रहा है?
यह इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण नया पहलू है।
IMD के 29 अक्टूबर के बुलेटिन के अनुसार, दक्षिण अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में एक नया निम्न दबाव क्षेत्र बना है।
इसकी संभावित गतिविधियां:
- 29 अक्टूबर: दक्षिण अंडमान सागर में निम्न दबाव का क्षेत्र बना।
- 31 अक्टूबर के आसपास: इसके दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में डिप्रेशन बनने की संभावना जताई गई।
- इसके बाद: यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है।
- अगले दो दिनों में: आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ने का अनुमान जताया गया है।
हालांकि, अभी इसे नया चक्रवात घोषित नहीं किया गया है। इसकी तीव्रता और आगे का रास्ता आने वाले मौसम बुलेटिन पर निर्भर करेगा।
ओडिशा के दक्षिणी जिलों में 1 से 3 नवंबर के बीच इस नई मौसम प्रणाली के कारण फिर भारी बारिश हो सकती है।
11. क्या रेल और हवाई सेवाओं पर भी पड़ा असर?
चक्रवात के कारण आंध्र प्रदेश और ओडिशा में रेल एवं हवाई सेवाएं प्रभावित हुईं।
रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई ट्रेनों को रद्द किया, कुछ का मार्ग बदला और कुछ ट्रेनों को बीच रास्ते में ही रोकना पड़ा।
विशाखापत्तनम-भुवनेश्वर वंदे भारत सहित कई रेल सेवाएं भी प्रभावित हुईं।
ओडिशा के इचापुरम-जाडुपुड़ी रेल सेक्शन में जलभराव के कारण परिचालन बाधित हुआ। 30 अक्टूबर तक भी कुछ ट्रेनें रद्द या डायवर्ट की गईं।
रेलवे ने स्पष्ट किया कि पानी का स्तर घटने और ट्रैक व पुलों की सुरक्षा जांच के बाद ही सामान्य परिचालन बहाल किया जाएगा।
12. प्रशासन की तैयारी और राहत कार्य
केंद्र और राज्य सरकारों ने चक्रवात के आने से पहले ही तैयारियां शुरू कर दी थीं।
राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC) की बैठक में मौसम विभाग ने तूफान की दिशा और संभावित प्रभावों की जानकारी दी थी।
NDRF, SDRF, भारतीय तटरक्षक बल, सेना और अन्य संबंधित एजेंसियों को तैयार रखा गया था।
आंध्र प्रदेश और ओडिशा में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत शिविर स्थापित करने और आवश्यक सेवाओं को बहाल करने के लिए काम किया गया।
अब प्रभावित इलाकों में बिजली, पेयजल, सड़क और संचार व्यवस्था की बहाली प्राथमिकता बनी हुई है।
निष्कर्ष: कमजोर पड़ा चक्रवात, लेकिन मौसम की चुनौती अभी बाकी
Cyclone Arnab अब समुद्र में मौजूद एक शक्तिशाली चक्रवात नहीं रह गया है। यह जमीन पर आने के बाद कमजोर होकर डिप्रेशन और फिर निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की प्रक्रिया से गुजरा है।
लेकिन इसकी वजह से हुई भारी बारिश का प्रभाव अभी भी दिखाई दे रहा है। ओडिशा और आंध्र प्रदेश में बाढ़, बिजली व्यवस्था और परिवहन पर असर के बाद अब उत्तर और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश और खराब मौसम की संभावना बनी हुई है।
इसके साथ ही दक्षिण अंडमान सागर में एक नई निम्न दबाव प्रणाली का बनना आने वाले दिनों के लिए एक और महत्वपूर्ण मौसम घटनाक्रम है।
नोट: यह रिपोर्ट 30 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध मौसम विभाग के बुलेटिन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। मौसम की स्थिति तेजी से बदल सकती है। ताजा जिला-स्तरीय अलर्ट के लिए IMD की आधिकारिक चेतावनियों को प्राथमिकता दें।

